दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के इंतजामों का सच मंगलवार की आधी रात को उस वक्त सामने आ गई, जब अचानक ढेर सारी प्रतिमाओं को लेकर श्रद्धालु पहुंच गए। रात में नगर निगम की ओर से लगाए गए कर्मचारी चले गए थे जिसके चलते कृत्रिम पोखरे से मलवा निकाला नहीं जा सका। वहीं, पोखरे में पानी भी नहीं ही बचा था। प्रतिमा विसर्जन को आए श्रद्धालु नाराज होकर धरना-प्रदर्शन की तैयारी करने लगे। लेकिन, पुलिस वालों ने उन्हें समझाया और फिर आला अफसरों को इसकी जानकारी दी। नगर आयुक्त के हस्तक्षेप के बाद भोर में चार बजे कर्मचारी पहुंचे और फिर से विसर्जन शुरू कराया जा सका।
जानकारी के मुताबिक, डोमिनगढ़ के पास स्थापित मूर्तियों को भी एकला बंधे के पास बने पोखरे में भेजा दिया गया। एक तो इसकी पहले से लोगों को जानकारी नहीं थी, दूसरे अचानक नगर निगम कर्मचारियों के चले जाने से मुसीबत खड़ी हो गई। पोखरे के पास लोग पहुंचे तो वहां पर पानी ही कम था और दूसरे पहले से विसर्जित की गई मूर्तियों के मलवा नहीं हटाया गया था।
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नाराज होकर लोगों ने प्रतिमा विसर्जन करने से इनकार कर दिया और धरने की तैयारी करने लगे। यह देख पुलिस भी परेशान हो गई। पुलिस जब समझाने लगी तो विसर्जन करने वालों का तर्क था कि वह इतनी महंगी मूर्ति बैठाए थे, इतने भक्ति से पूजा किए और ऐसे में विसर्जन नहीं करेंगे। बाद में आला अफसरों ने हस्तक्षेप किया तो ठेकेदार पहुंचा और फिर कर्मचारी आए।
नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने कहा कि करीब डेढ़ घंटे तक एक-दो गाड़ी के चालक मौके पर नहीं थे। इससे मोटर चलाने और पानी को तालाब में गिराने का काम सुस्त रहा। अचानक से डेढ़ से दो बजे के बाद राप्ती नदी किनारे ही मूर्तियों को विसर्जन करने लोग आने लगे। भीड़ बढ़ने से कृत्रिम तालाब का पानी कम हो गया था। लेकिन, सूचना मिलते ही दूसरी टीम को वापस मौके पर एक से सवा घंटे के भीतर ही पूरी व्यवस्था से फिर से पहले की तरह शुरू करवा दी गई।