राप्तीसागर एक्सप्रेस (12511) में बीते छह मार्च को यात्रा के दौरान कोरोनावायरस से संदिग्ध संक्रमित यात्री पाए जाने के बाद रेलवे से बड़ी चूक हुई है। ट्रेन के पेंट्रीकार के वेंडरों की जांच ही नहीं कराई गई। सभी वेंडर अभी भी ट्रेन में चल रहे हैं। इनसे भी संक्रमण का खतरा बना हुआ है। लखनऊ के सीनियर डीसीएम अंबर प्रताप सिंह ने बताया कि प्राइवेट कर्मचारी होने के चलते रेल प्रशासन उनकी जांच नहीं करा सकता, इसके लिए रेलवे बोर्ड को पत्र लिखा गया है।
संक्रमण का संदिग्ध यात्री गोरखपुर से ट्रेन के एस-4 कोच में सवार हुआ था और उसकी तबीयत भोपाल स्टेशन के बाद खराब हुई। सूचना के बाद अगले स्टेशन पर चिकित्सकों ने मरीज की जांच की और कोरोना से संक्रमण की आशंका जताई। इसके बाद यात्री को वारंगल रेलवे स्टेशन पर उतार लिया गया। साथ ही पूरी बोगी भी खाली करा दी गई, लेकिन ट्रेन के पेंटीकार में सवार वेंडरों की जांच नहीं कराई गई, जबकि वेंडर खानपान के सामान बेचने के लिए एस-4 कोच में भी गए थे।
रेलवे स्टेशन पर हड़कंप
राप्तीसागर एक्सप्रेस में कोरोना वायरस से संदिग्ध संक्रमित यात्री के पाए जाने के बाद रेलवे स्टेशन पर हड़कंप मचा है। ट्रेन में गए चारों टीटीई वापसी पर काफी देर तक टीटीई रूम में बैठे थे। उनके साथी भी डरे-सहमे हुए हैं। हालांकि सोमवार को दोपहर जब साथी टीटीई को यह पता चला कि चारों में कोई भौतिक लक्षण नहीं दिखे हैं, तो उन्होंने राहत की सांस ली।