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कोरोना से जंग: वैक्सीन लगवाने वाले व्यक्ति के प्लाज्मा दान पर अभी कोई गाइडलाइन नहीं

Fri, 07 May 2021 01:53 PM IST
vivek shukla डिजिटल न्यूज नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

कोरोना संक्रमण से उबरने वालों का प्लाज्मा ही इलाज में कारगर। वैक्सीनेशन करवाने वाले लोगों से सोशल मीडिया पर प्लाज्मा दान की अपील पर, कई लोगों ने दान के बाबत जानकारी चाही।
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वैक्सीन की दोनों डोज लगवाने के 28 दिन बाद व्यक्ति के प्लाज्मा दान पर अभी यहां कोई गाइडलाइन नहीं मिली है। वैक्सीनेशन करवाने वाले लोगों से सोशल मीडिया पर प्लाज्मा दान की अपील पर, कई लोगों ने दान के बाबत जानकारी चाही। फोन करके कुछ लोगों ने अमर उजाला से वास्तविक स्थिति जाननी चाही, पड़ताल में यह तथ्य सामने आए। फिलहाल, कोरोना वायरस की चपेट में आए लोगों के इलाज में केवल उन्हीं लोगों का प्लाज्मा कारगर माना जा रहा है, जो इस संक्रमण से उबर चुके हैं।
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चिकित्सकों का कहना है कि टीका लेने वाले स्वस्थ्य व्यक्तियों के शरीर में इस बीमारी से लड़ने वाली एंटीबॉडीज के बनने की प्रक्रिया पर फिलहाल अध्ययन चल रहा है। जल्द ही इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की ओर से कोई गाइडलाइन आ सकती है कि वैक्सीन लगवाने वाले ऐसे व्यक्ति टीका लगने के 14 दिनों के बाद रक्तदान कर सकते हैं।

फिलहाल अभी, केवल संक्रमण से ठीक हुए कोरोना पीड़ितों से ही प्लाज्मा दान लिया जा रहा है, लेकिन उसके भी कई तय मानक हैं। कोरोना के गंभीर मरीजों का जीवन बचाने के लिए प्लाज्मा थेरेपी दी जाती है। इसमें बीमार व्यक्ति को ऐसे समान ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति का प्लाज्मा चढ़ाया जाता है, जो कोरोना संक्रमित होकर स्वस्थ हो चुका है। 
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चिकित्सकों के अनुसार संक्रमित होकर स्वस्थ हुए व्यक्ति के रक्त में इस बीमारी के प्रति एंटीबॉडीज विकसित हो जाती हैं। एंटीबॉडी युक्त प्लाज्मा बीमार व्यक्ति को ट्रांसफ्यूजन करने से उसके शरीर की भी इस बीमारी के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। 

जिला अस्पताल ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. एसके यादव बताते हैं कि प्लाज्मा दान करने से पहले व्यक्ति का एंटीबॉडी टायटर टेस्ट किया जाता है। इस टेस्ट से यह पता चलता है कि उस व्यक्ति के शरीर में कितनी मात्रा में एंटीबॉडीज विकसित हुई है। 

बीआरडी मेडिकल कॉलेज ब्लड बैंक की काउंसलर मीनाक्षी मिश्रा के अनुसार फिलहाल उन्हीं लोगों के प्लाज्मा लेने की गाइडलाइन है, जो पहले कोविड पॉजिटिव हुए और इलाज के बाद उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई है।

पहले या दूसरे टीके के 14 दिन बाद कर सकते हैं रक्तदान

अब कोविड टीके की पहली या दूसरी डोज लगने के बाद अगले 14 दिनों के बाद रक्तदान किया जा सकता है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से इस संबंध में नई गाइडलाइन जारी की गई है। जिला अस्पताल ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. राजेश यादव ने बताया कि नई गाइडलाइन के अनुसार कोई भी व्यक्ति जिसे कोविड का पहला टीका लगा है, वह टीका लगने के 14 दिनों के बाद रक्तदान कर सकता है। 

इसी तरह दूसरा टीका लगने के भी चौदह दिन बाद रक्तदान कर सकता है। उन्होंने बताया कि अप्रैल की पुरानी गाइडलाइन में दूसरा टीका लगने के 28 दिन बाद रक्तदान की व्यवस्था थी। मई में जारी हुई नई गाइडलाइन में यह पहले या दूसरे टीके के चौदह दिन बाद रक्तदान की स्वीकृति देती है। वह सभी लोगों से रक्तदान की अपील करते हुए कहते हैं कि थैलेसीमिया, एप्लास्टिक अनीमिया, कैंसर रोगी, डायलिसिस रोगियों के अलावा गर्भवती महिलाएं, गंभीर रूप से घायल, रक्ताल्पता के शिकार मरीजों को रक्त की आवश्यकता रहती है। यह आवश्यकता रक्तदाताओं के दान किए गए रक्त से ही पूरी होती है।
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प्लाज्मा, रक्तदान है पूर्णतया सुरक्षित

बीआरडी मेडिकल कॉलेज ब्लड बैंक के लैब टेक्नीशियन कलाम अहमद बताते हैं कि प्लाज्मा या रक्तदान की पूरी प्रक्रिया पूर्णतया सुरक्षित और विसंक्रमित माहौल में संपन्न की जा रही है। ब्लड बैंक दिन में तीन बार विसंक्रमित (सैनिटाइज) किया जाता है। ब्लड बैंक की काउंसलर मीनाक्षी बताती हैं कि प्रत्येक रक्त या प्लाज्मा दान के लिए चिकित्सक पहले सैनिटाइज होते हैं। नए ग्लव्स पहन कर ही ब्लीड कराया जाता है। ब्लड बैंक में रक्तदाता की देखभाल के लिए चिकित्सक, ऑक्सीजन आदि मौजूद हैं। रक्तदान में अंतरराष्ट्रीय स्तर के सभी सुरक्षा मानक का पालन किया जाता है।
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