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होम आइसोलेट मरीजों के लिए कारगर होगी ऑक्सीजन थेरेपी

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होम आइसोलेट मरीजों के लिए कारगर होगी ऑक्सीजन थेरेपी
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गोरखपुर। होम आइसोलेट मरीजों के लिए ऑक्सीजन थेरेपी कारगर साबित हो सकती है। इसमें मशीनों के जरिए घर पर ही मरीजों का ऑक्सीजन लेबल माप कर जरूरत के अनुसार उसे उपलब्ध कराया जा सकता है। इस सुविधा से अस्पतालों में बेड की कमी की समस्या तो दूर होगी ही, अगर मरीजों को सांस लेने में परेशानी होगी तो उनका तत्काल इलाज भी घर पर ही शुरू हो सकेगा। आईएमए ऑक्सीजन थेरेपी की सुविधा के लिए प्रयासरत है।
प्रदेश में होम आइसोलेशन की सुविधा से प्रशासन को काफी हद तक राहत मिली है। अगर यह निर्णय नहीं लिया जाता, तो अब तक बेड के लिए मारा-मारी की स्थिति उत्पन्न हो जाती। डॉक्टरों का मानना है कि अगर लेवल-टू और थ्री के मरीजों की स्क्रीनिंग सही तरीके से घर पर हो जाए, तो करीब 20 प्रतिशत बेड और खाली हो जाएंगे, लेकिन इसके लिए ऑक्सीजन थेरेपी की सुविधा शुरू करनी होगी। आईएमए के अध्यक्ष डॉ. एससी कौशिक ने बताया कि होम ऑक्सीजन थेरेपी से अस्पतालों में कम बेड से भी काम चलाया जा सकता है। इसके लिए मेडिकल छात्रों और नर्सिंग छात्रों को प्रशिक्षित करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि इस सुविधा के लिए हम प्रयासरत हैं। इससे काफी हद तक मरीजों को राहत मिलेगी और ऑक्सीजन लेवल कम होने की स्थिति में मरीजों की जान बचाई जा सकती है।
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ऑक्सीजन थेरेपी के लिए इन मशीनों की होगी जरूरत
होम आइसोलेट मरीजों के शरीर में ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा बनाए रखने के लिए की जाने वाली प्रक्रिया को ऑक्सीजन थेरेपी कहते हैं। इसके लिए ऑक्सीमीटर मशीन और ऑक्सीजन कंसट्रेट मशीन लगवाने पड़ते हैं। ये मशीनें बिजली और बैटरी दोनों से चलती हैं। इन मशीनों से ऑक्सीजन का लेवल शरीर में नापा जा सकता है। जरूरत के अनुसार मरीज को ऑक्सीजन दिया भी जा सकता है।
ये सावधानी बरतें होम आइसोलेट मरीज
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चेस्ट विभागाध्यक्ष डॉ अश्वनी मिश्रा ने बताया कि जिन मरीजों को पहले से कोई बीमारी है, जैसे शुगर, बीपी या फिर ह्दय रोग आदि, तो ऐसे मरीजों पर कोरोना का असर सबसे ज्यादा होता है। ऐसी स्थिति में फेफड़े का काम कम हो जाता है और धमनी रक्त में ऑक्सीजन का दबाव भी कम हो जाता है। इसकी वजह से शरीर के दूसरे हिस्से में जाने वाले रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है और मरीजों की जान भी चली जाती है। ऐसी स्थिति में मरीजों को तत्काल ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। बताया कि इस समस्या से निपटने के लिए पोर्टेबल ऑक्सीजन सिलेंडर और ऑक्सीजन नापने के लिए पल्स ऑक्सीमीटर सहारा है। यह मशीनें बाजार में उपलब्ध भी हैं। होम आइसोलेट मरीज इसे जरूर रखें।
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ऑक्सीजन लेवल 90 से कम हो तो तत्काल डॉक्टर के पास जाएं
डॉ अश्वनी मिश्रा ने बताया कि उम्रदराज लोगों में ऑक्सीजन की जरूरत ज्यादा होती है। सामान्य तौर पर पल्स ऑक्सीमीटर यदि ऑक्सीजन लेवल 95 से 100 तक दिखाए तो घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर 90 से कम है तो यह हाइपोक्योसोमिया या ब्लड टिश्यू में ऑक्सीजन की कमी का संकेत है। ऐसे में ऑक्सीजन देना जरूरी है। इस स्थिति में मरीज को तत्काल डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए।
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