आठ दिसंबर के पहले आने वालों को 28 दिन तक घर पर ही रहने की हिदायत दी गई है। उनकी नियमित निगरानी की जा रही है। उनमें कोई लक्षण नजर आने पर तत्काल उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती करा दिया जाएगा और आरटीपीसीआर जांच कराई जाएगी।
यदि जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो यूरोपीय वायरस का जीनोम टेस्ट करने के लिए उनका नमूना नेशनल इंस्टीट्यूट आफ बायोलॉजिकल्स (एनआइबी) पुणे भेजा जाएगा। यदि यूरोप में फैले वायरस का जिनोम मिलता है तो उन्हें अस्पताल में ही रहना होगा। 14 दिन बाद पुन: जांच कराई जाएगी। रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर हर 24 घंटे पर जांच होगी।
पॉजिटिव आने पर होगी पूरे परिवार की जांच
अगर किसी की रिपोर्ट पाजिटिव आती है तो उसके पूरे परिवार तथा जिन लोगों से वह मिला है, सबकी जांच कराई जाएगी। उनके भी पाजिटिव आने पर उनका नमूना एनआइबी पुणे भेजा जाएगा। उन्हें भी अलग वार्ड में रखा जाएगा।
यूरोप से आए लोग यदि पॉजिटिव आते हैं तो उनके लिए अलग वार्ड बनाया जाएगा। उसका नाम इंटरनेशनल ट्रैबलर वार्ड रखा जाएगा।
पुराने ढर्रे पर ही इलाज
यूरोपीय वायरस का जिनोम मिलने पर भी पुराने ढर्रे पर ही इलाज होगा। क्योंकि उसके हिसाब से इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। कोरोना मरीजों का जो पहले से इलाज चल रहा है, इन मरीजों का भी वही इलाज किया जाएगा।
कहां से कितने यात्री आए
स्पेन से एक, ढाका से एक, कोपेनगन से एक, केपटाउन से एक, रोम से दो, बर्सिलोना से एक, अटलांटा (यूरोप से होकर आया है) एक और लंदन से 33 यात्री आए हैं।
सीएमओ डॉ श्रीकांत तिवारी ने कहा कि कुल 41 लोग यूरोप से आए हैं। सबकी पहचान कर ली गई है। सभी की एंटीजन रिपोर्ट निगेटिव है। नौ लोगों का आरटीपीसीआर जांच के लिए नमूना भेजा गया है। इसमें से दो लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है। यूरोप से आए लोगों पर विशेष नजर रखी जा रही है।