गोरखपुर में कोरोना संक्रमित गर्भवती महिलाओं की सुरक्षित डिलीवरी एवं किडनी की बीमारी से जूझ रहे संक्रमितों की डायलिसिस की समस्या दूर होगी। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऐसे मरीजों की इलाज की सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। सामान्य अस्पतालों में इनका इलाज नहीं हो रहा और कई कोविड अस्पतालों में इस तरह की सुविधा नहीं है।
जिला प्रशासन की अपील पर एम्स प्रबंधन ने अपनी सहमति दे दी है और जल्द ही ये सुविधाएं शुरू हो जाएंगी। इसके अलावा एम्स के लैब में जल्द ही कोरोना की आरटीपीसीआर रिपोर्ट भी तैयार हो सकेगी। इन तीन महत्वपूर्ण सुविधाओं से जिला प्रशासन को भी काफी आसानी होगी।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज व आरएमआरसी के बाद एम्स में भी आरटीपीसीआर रिपोर्ट तैयार करने के लिए लैब की व्यवस्था हो चुकी है। एम्स प्रबंधन जल्द ही आरटीपीसीआर रिपोर्ट देने लगेगा। प्रतिदिन करीब 3000 रिपोर्ट जारी करने की क्षमता एम्स की लैब के पास होगी।
जिलाधिकारी के. विजयेंद्र पाण्डियन ने बताया कि कोविड के समय कोरोना से संक्रमित गर्भवती महिलाओं की सुरक्षित डिलीवरी, किडनी के मरीजों की डायलसिस आदि बड़ी समस्या था। बातचीत के बाद इन सुविधाओं के लिए एम्स प्रबंधन राजी हो गया है। जल्द ही वहां ये सुविधाएं मिलने लगेंगी। इसके साथ ही आरटीपीसीआर जांच भी हो सकेगी।