गोरखपुर जिले में कोरोना कर्फ्यू में घरेलू गैस और डीजल-पेट्रोल की खपत में 25 से 40 फीसदी तक की कमी आ गई है। इसका प्रमुख कारण कामगार परिवारों का जिले से लौट जाना और वाहनों का कम इस्तेमाल किया जाना बताया जा रहा है।
पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विश्व नारायण सिंह के अनुसार कोरोना कर्फ्यू के दौरान पेट्रोल और डीजल की खपत में 40 फीसदी से अधिक कमी आई है। जिले में शहर और देहात मिलाकर करीब डेढ़ सौ पेट्रोल पंप हैं। शहर के अधिकतर पंप पर पहले पेट्रोल-डीजल की बिक्री का औसत करीब चार हजार लीटर प्रतिदिन था, जो अब प्रतिदिन औसतन 2400 से 2600 लीटर है। डीजल की मांग अधिक है।
इसकी वजह है कि आवश्यक वस्तु आदि की पूर्ति के लिए ट्रक, ऑटो आदि डीजल चलित वाहन अधिकतर चल रहे हैं। इसके बावजूद डीजल की खपत में कमी आई है। पेट्रोल की मांग में ज्यादा कमी आई है।
वहीं, एलपीजी डीलर के मुताबिक जिले में छह लाख घरेलू और कॉमर्शियल गैस उपभोक्ता हैं। कोरोना कर्फ्यू से पहले जिले में प्रतिदिन औसतन पचास ट्रक एलपीजी सिलिंडर की खपत होती थी। अब यह मांग घटकर 36 से 38 ट्रक रह गई है। इनमें घरेलू गैस सिलिंडरों की मांग करीब 25 फीसदी घटी है।
दरअसल, लोगों के गैस इस्तेमाल करने के पैटर्न में भी बदलाव आया है। पहले एक सिलिंडर की रीफिलिंग औसतन 21 से 22 दिन में होती थी, अब यह 28 से 29 दिन में कराई जा रही है। इसका अर्थ हुआ कि लोग घरेलू गैस का उपयोग किफायत से कर रहे हैं। काम छूटने के की वजह से करीब चार हजार घरेलू गैस उपभोक्ता दूसरे जिलों में जा चुके हैं।
सबसे ज्यादा कमी कॉमर्शियल गैस सिलिंडर की मांग में आई है। इसकी वजह यह है कि अधिकतर दुकानें, रेस्टोरेंट, फूड कोर्ट्स आदि बंद हैं। कुछ जरूरी सेवाओं में ही कॉमर्शियल सिंलिंडर का इस्तेमाल किया जा रहा है। इंडेन गैस के एरिया मैनेजर मुनीश कुमार ने बताया कि कोरोना संक्रमण से बचाव के कारण क्वारंटीन हैं, वर्तमान में गैस की खपत के आंकड़े उनके पास मौजूद नहीं हैं।