दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में स्वर्ण पदक के मामले में छात्राओं ने छात्रों को काफी पीछे छोड़ दिया है। 30 अगस्त को होने वाले 43वें दीक्षांत समारोह में कुल 55 विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक में 47 छात्राओं को मिलेंगे। कुलाधिपति एवं राज्यपाल आनंदीबेन इन्हें मेडल पहनाएंगी। बेटियों ने विश्वविद्यालय के साथ-साथ अपने माता-पिता और शिक्षकों का नाम रौशन किया है।
किताब के साथ प्रैक्टिकल पर दिया ध्यान
एमए विजुअल आर्ट की टॉपर प्रतिष्ठा मिश्रा ने अपनी कला और सूझबूझ से विषय को टॉप किया। देवरिया के पिपरा मिश्र गांव की रहने वाली प्रतिष्ठा ने बताया कि उसने पाठ्यक्रम के साथ प्रैक्टिकल पर ज्यादा ध्यान दिया। इसका उसे काफी लाभ मिला।
कहा कि प्रैक्टिकल की मदद से हम अपनी कला को और निखार सकते हैं। यह भी बताया कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर विद्यार्थी अपनी पेंटिंग को लोगों के बीच पेश कर आ सकते हैं। यह उनके लिए एक अच्छा आय का स्रोत हो सकता है।
यू-टयूब की मदद से की पढ़ाई
बीबीए की टॉपर जिज्ञासा शाही ने बताया कि कोरोना के समय उसका प्रवेश हुआ। परीक्षा का पैटर्न बदल कर सीबीसीएस मोड में हो गया था, जिससे पहले सेमेस्टर में काफी परेशानी हुई थी। शिक्षकों के नोट्स काफी लाभदायक थे। यू-ट्यूब की मदद से भी पढ़ाई की।
कहा कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल सकारात्मक रूप से करें तो यह बहुत अच्छा है। महुआपार बड़हलगंज की जिज्ञासा ने बताया कि पढ़ाई में शिक्षकों और अभिभावकों का साथ मिला जिसकी वजह से यह सफलता मिली है।
सिविल सेवा में जाना चाहती हैं दीपशिखा
एमए मनोविज्ञान की टॉपर दीपशिखा सिंह ने बताया कि वो पढ़ाई के साथ ही सिविल सर्विस और यूजीसी नेट की तैयारी कर रही हैं। दीपशिखा का कहना है शिक्षकों के नोट्स को यदि अच्छे से पढ़ लिया जाए तो परीक्षा में अच्छे अंक हासिल किए जा सकते हैं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय विभाग के शिक्षकों और माता-पिता को दिया। बताया कि वह अपना ज्यादातर समय समय किताबों के बीच व्यतीत करतीं हैं।