सब गोलमाल है...शहर से बाहर हुईं तो निजी बसें बन गईं अनुबंधित
खेल: रोडवेज की बसों के रंग में रंगकर और अनुबंधित लिखकर चल रहीं निजी बसें
रोडवेज के मुताबिक, मार्च के बाद नहीं हुआ है नई बसों से अनुबंध
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। शहर से प्राइवेट बसें बाहर होने के बाद अनुबंधित बसों की भरमार हो गई है। प्रतिबंधित इलाकों में हर तरफ अनुबंधित बसें ही नजर आने लगी हैं। सड़कों पर ये बिना रोकटोक फर्राटा भर रही हैं, जबकि परिवहन निगम में मार्च के बाद से किसी प्राइवेट वाहन से रोडवेज का अनुबंध नहीं हुआ है। इन पर सख्ती का कोई आदेश भी ट्रैफिक पुलिस के पास नहीं है। ऐसे में इस मनमानी को रोके कौन और कैसे? यानि सब गोलमाल है। इसकी वजह से शहर को जाम से निजात नहीं मिल पा रही है।
शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए रेलवे बस स्टेशन के पास से संचालित होने वाली निजी बसों को शहर से बाहर कर दिया गया था, लेकिन निजी बस संचालकों ने पुलिस को चकमा देने का दूसरा रास्ता खोज निकाला है। बस संचालक निजी बसों को रोडवेज की बसों के रंग में रंगवाकर उस पर अनुबंधित लिखवा शहर से संचालित कर रहे हैं।
शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे रेलवे स्टेशन से बस अड्डा मार्ग पर रोडवेज के रंग में रंगी एक नई बस जिस पर अनुबंधित लिखा था, लेकिन बस पर अनुबंध की वैधता तिथि नहीं लिखी थी। वह रोडवेज बसों के बीच खड़ी होकर सवारी की तलाश कर रही थी, जबकि निगम से मिली जानकारी के मुताबिक आठ महीने से रोडवेज के साथ किसी निजी बस का अनुबंध नहीं हुआ है। सिर्फ यही बस नहीं बल्कि महाराणा प्रताप प्रतिमा के पास भी कई अन्य बसें भी सवारियां भरती नजर आईं।
गोरखपुर परिक्षेत्र में हैं 334 अनुबंधित बसें
रोडवेज के अनुसार गोरखपुर परिक्षेत्र के आठ डिपो में 334 अनुबंधित बसें हैं। इनमें सबसे अधिक गोरखपुर डिपो में हैं। मार्च के बाद किसी भी निजी बस का अनुबंध रोडवेज के साथ नहीं हुआ है।
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कोट
निजी बसें बिना रोकटोक रेलवे बस स्टेशन के आसपास से संचालित हो रही हैं। इनमें कुछ बसें रोडवेज की बसों की तरह ही रंगी हैं। इससे लोग इनकी पहचान नहीं कर पाते हैं। ये फर्जी टिकट दे रहे हैं। इसकी शिकायत पुलिस और जिला प्रशासन से की गई है।
-महेश चंद्र, एआरएम, गोरखपुर डिपो