जिले भर में 50 से अधिक जगहों पर इस पाउडर से मिलावटी पनीर बनाया जा रहा है। इस मिल्क पाउडर में फैट के लिए रिफाइंड ऑयल और मिठास के लिए सैकरीन का इस्तेमाल हो रहा है, जो लिवर और आंत को सीधे प्रभावित कर रहे हैं। शाकाहारी लोग स्वाद के लिए आजकल पनीर को सबसे अधिक तवज्जो दे रहे हैं।
अगर आप दूध-पनीर और छेना की मिठाई के शौकीन हैं तो खाने से पहले एक बार इनके बारे में खुद भी पता कर लें, क्योंकि आपको मिलावटी सामान खिलाया जा रहा है। शहर में करीब 10 बड़े दुकानदार केवल अब दूध के लिए पाउडर ही बेचते हैं।
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इनकी दुकान व गोदाम से हर दिन करीब एक हजार क्विंटल मिल्क पाउडर की बिक्री हो रही है। इसका इस्तेमाल चाय की दुकानों पर दूध व मिठाई बनाने में हो रहा है। ऐसे में ये उत्पाद कितने गुणवत्तापूर्ण होंगे, आसानी से समझा जा सकता है।
जिले भर में 50 से अधिक जगहों पर इस पाउडर से मिलावटी पनीर बनाया जा रहा है। इस मिल्क पाउडर में फैट के लिए रिफाइंड ऑयल और मिठास के लिए सैकरीन का इस्तेमाल हो रहा है, जो लिवर और आंत को सीधे प्रभावित कर रहे हैं।
शाकाहारी लोग स्वाद के लिए आजकल पनीर को सबसे अधिक तवज्जो दे रहे हैं। स्थिति यह है कि अकेले खोवा मंडी में हर दिन करीब 50 क्विंटल पनीर की खपत हो रही है। सहालग में यह बढ़कर 80 क्विंटल तक पहुंच जा रहा है।
इसके अलावा बिछिया, मोहद्दीपुर, मेडिकल कॉलेज, सोनौली रोड और फलमंडी इलाके में भी पनीर बनता है। ग्रामीण इलाके में पिपराइच, कैंपियरगंज, भटहट के अलावा खजनी और बड़हलगंज क्षेत्र में भी पनीर बन व बिक रहा है। बाजार के सूत्रों का अनुमान है कि जिले में हर दिन करीब 400 क्विंटल पनीर की खपत है।
बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर मिल्क पाउडर और रिफाइंड का प्रयोग कर कृत्रिम पनीर बन रहा है। इसका असर बाजार पर पड़ रहा है और गोरखपुर में मिल्क पाउडर की प्रतिदिन की खपत एक हजार क्विंटल को पार कर गई है। एक साल में तीन से चार दुकानें मिल्क पाउडर की बढ़ी हैं।
महज 250 ग्राम पाउडर से बनता है एक किलो पनीर
मिठाई बनाने के कारीगर राजाराम ने बताया कि एक किलो पनीर बनाने में करीब 250 ग्राम पाउडर की जरूरत होती है। पाउडर को अच्छी तरह से घोलने के बाद इसमें नींबू का रस मिलाया जाता है, जिससे वह दही जैसा बन जाता है। इसे कपड़े में बांधकर ठंडे पानी में डुबोया जाता है।
इसके बाद फ्रिज में रख दिया जाता है। इस तरह से तैयार पनीर में करीब 200 ग्राम पानी और 800 ग्राम ठोस पदार्थ होता है। बाजार में पनीर व छेना की मिठाई बनाने के लिए अलग मिल्क पाउडर है, जिसकी कीमत 270 से 300 रुपये प्रति किलोग्राम है।
वहीं, चाय वाला मिल्क पाउडर भी 300 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास है। इनमें ब्रांडेड से लेकर लोकल कंपनियाें तक के उत्पाद शामिल हैं। यह पाउडर पांच व 10 किलोग्राम के पैकेट में है। वहीं, एक किलोग्राम व 500 ग्राम वाले मिल्क पाउडर भी हैं, जिनकी कीमत 500 से 600 रुपये प्रति किलोग्राम है।
चिकनाई के लिए डालते हैं रिफाइंड
मिल्क पाउडर को बनाने के लिए उसे फैट शून्य करना पड़ता है। केवल डेनमार्क से आने वाले उच्च श्रेणी के मिल्क पाउडर में ही कुछ मात्रा में फैट पाया जाता है। इसीलिए पाउडर से दूध बनाते समय उसमें फैट के लिए रिफाइंड ऑयल डाल दिया जाता है।
इसे अधिक सफेद बनाने के लिए व्हाइटनर का इस्तेमाल होता है। अगर पाउडर से केवल चाय के लिए दूध बनानी हो तो उसमें रिफाइंड की जगह सैकरीन का इस्तेमाल होता है, ताकि दूध में मिठास बनी रहे। इसके अलावा मिठाई बनाने के लिए तैयार दूध में भी सैकरीन का इस्तेमाल होता है।
बरईपार और गोपालपुर में पकड़ा जा चुका है मामला
मिल्क पाउडर, रिफाइंड और केमिकल से पनीर बनाने का धंधा बीते पांच मई को मानीराम इलाके के गोपालपुर सियारामपुर गांव में पकड़ा गया था। वहां अमृत डेयरी पर छापा मारकर दो क्विंटल पनीर पकड़ा गया, जो पूरी तरह से पाउडर और केमिकल से बनाया गया था। वहीं, पिपराइच क्षेत्र के बरईपार में पहले दो मई और फिर 20 मई को भी कृत्रिम पनीर बनाने का मामला पकड़ा गया। दोनों बार यहां केवल मिल्क पाउडर, सोडा, रिफाइंड और व्हाइटनर पाया गया।
एक्सपर्ट कमेंट
लिवर को खराब कर देगा यह पनीर
रिफाइंड और अन्य केमिकल से बने पनीर को खाने से लिवर पर सीधा असर पड़ेगा। इसमें पड़ा रिफाइंड लिवर में चिकनाहट लाएगा, जिससे फैटी लिवर की समस्या आएगी। इसके अलावा इस तरह का पनीर खाने से अपच और गैस्ट्रिक की समस्या आ सकती है। लिवर संक्रमित होने पर भोजन के पाचन की प्रक्रिया बिगड़ जाती है, जिसका असर शरीर की अन्य सभी गतिविधियों पर पड़ता है: डॉ. राजेश कुमार, वरिष्ठ फिजिशियन
लगातार पाउडर से पनीर बनाने के मामले पकड़े जाने के बाद पाउडर विक्रेताओं के यहां भी जांच कराई गई थी। मिल्क पाउडर का इस्तेमाल प्रतिबंधित नहीं है, बल्कि इसमें मिलाए जाने वाले केमिकल जैसे रिफाइंड, व्हाइटनर आदि का प्रयोग हानिकारक है। मिलावटी पनीर बनाने वालों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जा रही है: डॉ. सुधीर कुमार सिंह, सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा