महीने में महज 63 यूनिट बिजली का उपयोग करने वाले उपभोक्ता को निगम ने दो हजार का बिल भेज दिया। उपभोक्ता ने निगम के अधिकारियों से इसकी शिकायत भी की, लेकिन समस्या दूर नहीं हो सकी। व्यापारी ने बताया कि बिल में अन्य खर्चों को जोड़कर भेज दिया गया। उपभोक्ता इन खर्चों को समझ नहीं पाता है और अधिकारी उन्हें समझा भी नहीं पाते।
चतुर्थ खंड इलाके में रहने वाले अशोक यादव (खाता संख्या- 0782412000) के घर दस फरवरी को बिजली निगम से बिल पहुंचा। इसमें दो हजार रुपये की बकाएदारी थी। इतने कम यूनिट पर दो हजार रुपये का बिल देखा तो उन्हें अजीब लगा। बिल लेकर इसकी शिकायत जब उपकेंद्र पर की तो अधिकारियों ने बिल को सही बताया।
इसके बाद उन्होंने अमर उजाला के हेल्पलाइन नंबर पर इसकी सूचना दी। उपभोक्ता अशोक ने बताया कि 63 यूनिट पर नियमत: 472 रुपये का बिल बनना चाहिए। इसकी शिकायत करने पर अधिकारियों ने अतिरिक्त शुल्क, तकनीकी शुल्क, समेत अन्य तरह के सरचार्ज जोड़ने की बात बोल बिल को सही बताया।
अधिकारियों ने कहा कि सरकार ने व्यवस्था को बनाया है तो भुगतान करना पड़ेगा। उपभोक्ता ने बताया कि जितनी बिजली वो प्रयोग नहीं कर रहे उसका भुगतान भी करना पड़ रहा है। ऐसे में अगर व्यवस्था नहीं सुधरी तो उनकी तरह और उपभोक्ता परेशान होंगे।
बिजली बिल में अगर यूनिट संबंधी या बिल संबंधी कोई समस्या है तो इसकी सूचना दफ्तर आकर दें। इसकी जांच कराई जाएगी। अगर वाकई में गलती हुई तो तत्काल सही कराया जाएगा।
मुदित तिवारी, अधिशासी अभियंता चतुर्थ