उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र तैयार कराके भूमि हड़पने की साजिश के 12 आरोपियों के खिलाफ कैंट थाने में साजिश, धोखाधड़ी व कूटरचित दस्तावेज तैयार करने सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। मुकदमा एडीजी दावा शेरपा के हस्तक्षेप के बाद दर्ज किया गया।
बता दें कि जंगल महुअवा उर्फ मोहम्मदपुर के मेहंदी हसन के निधन की तारीख पर संशय है, फिर भी नगर निगम से मृत्यु प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया। इस तथ्य का पर्दाफाश ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सदर की जांच से हुआ है। पता चला कि नियम दरकिनार करके तत्कालीन मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने मृत्यु प्रमाणपत्र जारी कर दिया।
गलत तरीके से मृत्यु प्रमाणपत्र बनाए जाने का मामला सिटी बिल्डर्स एंड कालोनाइजर के पार्टनर दिग्विजय सिंह ने उठाया तो ज्वाइंट मजिस्ट्रेट गौरव सिंह सोगरवाल ने 10 दिसंबर 2020 को क्षेत्रीय लेखपाल से जांच कराई। क्षेत्रीय लेखपाल ज्योति गुप्ता ने जो रिपोर्ट दी, उसमें साफ कहा कि मेहंदी हसन के घर के आसपास रहने वाले कुछ लोगों ने 2003 में निधन की बात कही तो कुछ 2011 बता रहे हैं।
लिहाजा, मृत्यु की तारीख की पुष्टि नहीं की जा सकती है। इसकी रिपोर्ट पहले भी 11 नवंबर को भेजी जा चुकी है। क्षेत्रीय लेखपाल और ज्वाइंट मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट के बाद भी मेहंदी हसन का मृत्यु प्रमाणपत्र निरस्त नहीं किया गया। अब मामला कमिश्नर जयंत नार्लिकर व जिलाधिकारी के. विजयेंद्र पांडियन के पास पहुंचा है। कमिश्नर ने पूरे मामले में रिपोर्ट तलब की है।
क्या कहता है नियम
दरअसल, मेहंदी हसन का मृत्यु प्रमाणपत्र तत्कालीन मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अतुल कुमार ने 15 मार्च 2019 को बनाया था। इसमें मृत्यु की तारीख 15 मार्च 2011 दर्शायी गई है। सिटी बिल्डर्स एंड कालोनाइजर के पार्टनर दिग्विजय सिंह के आरोपों के मुताबिक यह सब भूमि के सेल टू एग्रीमेंट के लिए किया गया है। इस संबंध में मेहंदी हसन के परिजनों का पक्ष नहीं मिल सका है। पक्ष आते ही प्रकाशित किया जाएगा।
नियमानुसार किसी व्यक्ति की मृत्यु के एक वर्ष के अंदर नगर स्वास्थ्य अधिकारी प्रमाणपत्र बना सकते हैं। इससे ज्यादा का समय हुआ तो मृत्यु प्रमाणपत्र बनाने का अधिकार सिर्फ मजिस्ट्रेट को है। मेहंदी हसन के मामले में इस नियम का पालन नहीं किया गया है। मृत्यु (मार्च 2011) के आठवें साल यानी 2019 में तत्कालीन नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने मृत्यु का प्रमाणपत्र बना दिया। लिहाजा, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के समक्ष मृत्यु प्रमाणपत्र की वैधता को चुनौती दी गई है। कहा गया है कि आठवें साल में मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने का अधिकार मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी को नहीं है।
नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मुकेश रस्तोगी ने बताया कि मेहंदी हसन की मृत्यु हुई है, यह सही है। प्रापर्टी से संबंधित विवाद में आपत्तियां आईं हैं। इसकी छानबीन कराई जा रही है। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, फिर आगे की कार्रवाई होगी। मृत्यु प्रमाणपत्र को तत्कालीन मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अतुल कुमार ने जारी किया था। पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया है।