एसिटाबुलर फ्रैक्चर के ऑपरेशन के लिए अभी तक गोरखपुर में नहीं था कोई इंतजाम
- एम्स के डॉ. अरुण पांडेय की अगुवाई में किया गया बिहार की महिला का ऑपरेशन
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। एम्स के ट्रामा एवं इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के इंचार्ज और हड्डी एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ डॉ. अरुण पांडेय ने एसिटाबुलर फ्रैक्चर की सर्जरी एक नए और जटिल विधि से की। इससे पहले गोरखपुर में ऐसी सर्जरी नहीं हुई थी। ऐसे ऑपरेशन के लिए मरीजों को लखनऊ जाना पड़ता था। इस नई विधि का नाम है स्टोपा अप्रोच जो पेट में चीरा लगाकर किया जाता है।
एसिटाबुलर की सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. अरुण पांडेय ने बताया कि 52 वर्षीया बिहार प्रांत की रहने वाली एक महिला को कूल्हे की हड्डी की समस्या थी, जिसके लिए ऑपरेशन जरूरी था। लेकिन, यह सर्जरी गोरखपुर में नहीं होती थी। महिला एम्स पहुंची तो उसकी जांच कर सर्जरी का सुझाव दिया गया। स्टोपा अप्रोच विधि से सर्जरी डॉ. अरुण पांडेय की टीम ने करने का निर्णय लिया।
इस ऑपरेशन में ऑपरेशन तो कूल्हे की टूटी हड्डी का होता है, लेकिन चीरा पेट में लगाया जाता है। इस प्रकार के ऑपरेशन में पेट की जटिल नसों की इंजरी होने का खतरा रहता है। यह ऑपरेशन पूरी तरह से सफल रहा और मरीज अब स्वस्थ है।
ऑपरेशन सफल रहने पर एम्स निदेशक प्रो. सुरेखा किशोर ने पूरी ट्रामा टीम को बधाई दी है। ऑपरेशन करने वाली इस ट्रामा टीम में डॉ. सुहाष मल्ल, डॉ. अजहर, गोलू, आफरीन शामिल रहीं।
00
क्या है एसिटाबुलर फ्रैक्चर
कूल्हे का जोड़ एक बॉल और सॉकेट जोड़ है। सॉकेट भाग चिकनी उपास्थि से पंक्तिबद्ध होता है और इसे एसिटाबुलम कहा जाता है, जो श्रोणि का हिस्सा है। जब सॉकेट टूट जाता है, तो इसे एसिटाबुलर फ्रैक्चर कहा जाता है। इस तरह के फ्रैक्चर जोड़ के बॉल भाग के फ्रैक्चर की तुलना में बहुत कम आम हैं। एसिटाबुलर फ्रैक्चर से गति और कार्य प्रभावित हो जाते हैं।