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पनेशिया हॉस्पिटल का विवाद और गहराया, इस शख्स ने मुख्यमंत्री के पोर्टल पर की शिकायत, निदेशकों पर लगाया ये आरोप

Fri, 26 Jun 2020 09:22 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

  • बशारतपुर के रवि प्रकाश श्रीवास्तव ने निदेशकों पर 22 लाख रुपये की जालसाजी के आरोप लगाए
  • मामले की शिकायत मुख्यमंत्री के पोर्टल पर की
  • विवेक और विपिन अग्रवाल से भी 13 लाख रुपये ठगी के आरोप
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पनेशिया हॉस्पिटल। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर के पनेशिया हॉस्पिटल का विवाद और गहराता जा रहा है। अब रुकमनी एन्क्लेव आम बाजार बशारतपुर के रवि प्रकाश श्रीवास्तव सामने आए और हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. प्रमोद सिंह व अनिल सिंह के खिलाफ जालसाजी का आरोप लगाते हुए गुरुवार को मुख्यमंत्री के आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। रवि प्रकाश का आरोप है कि शेयर बेचने का लालच देकर लाखों रुपये हड़पे गए हैं। इसका ब्योरा भी उपलब्ध है। सभी भुगतान चेक से किए गए हैं।

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मुख्यमंत्री के पोर्टल पर भेजी गई शिकायत में रवि प्रकाश का आरोप है कि डॉ. प्रमोद सिंह व अनिल सिंह ने कूटरचित दस्तावेज बनवाकर कई लोगों से ठगी की है। पहले शेयर देने के नाम मुझसे 28 सितंबर 2018 को 11 लाख रुपये का चेक लिया। इसी तरह 5 अक्तूबर 2018 को 11 लाख रुपये का दूसरा चेक लिया। इसमें से 28 सितंबर को लिए गए चेक के 11 लाख रुपये डॉ. प्रमोद सिंह के बैंक खाते में स्थानांतरित हुए हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि इसी तरह विपिन अग्रवाल व विवेक अग्रवाल से भी ठगी हुई है। इन दोनों से 30 जनवरी 2019 को पांच लाख और 12 सितंबर 2019 को आठ लाख रुपये आरटीजीएस के जरिए वसूले गए हैं। उनका आरोप है कि कई बार रुपये की मांग की गई लेकिन धमकी के सिवा कुछ नहीं मिला। अब मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग की है। इन गंभीर आरोपों पर डॉ. प्रमोद सिंह का पक्ष नहीं मिल सका है। पक्ष मिलते ही उसे प्रकाशित किया जाएगा।

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अपराध साबित हो तो सांसद की ओर से दर्ज कराए गए केस में यह हो सकती है सजा

धारा 147 : उपद्रव करना (सजा दो साल या अर्थदंड या दोनों)
धारा 504, 506 : गाली-गलौज, धमकी देना (सजा दो साल या जुर्माना या दोनों)
एससी, एसटी एक्ट : सजा छह माह से लेकर पांच साल और जुर्माना)
विजय पांडेय की तहरीर पर दर्ज केस में यह हो सकती है सजा
धारा 395: डकैती (सजा आजीवन कारावास या दस वर्ष कठिन कारावास और आर्थिक दंड)
147 : उपद्रव करना (सजा दो साल या अर्थदंड या दोनों)
323 : जानबूझ कर स्वेच्छा से चोट पहुंचाना (सजा एक साल कारावास या एक हजार रुपये जुर्माना या दोनों)
504, 506 : उकसाना, धमकी देना (सजा दो साल या जुुर्माना या दोनों)
352 : आपराधिक बल का प्रयोग (तीन साल या जुर्माना या दोनों)

पुलिस की कार्रवाई पर डॉ प्रमोद ने उठाए सवाल
पनेशिया हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. प्रमोद सिंह ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मामले में उनकी तरफ से तहरीर दी गई थी। विजय पांडेय सहित तमाम लोगों ने आकर मारपीट व गुंडागर्दी की। कैश काउंटर से 35 हजार रुपये लूटकर चले गए। इस मामले में पुलिस ने मुकदमा नहीं दर्ज किया। भाजपा सांसद की तहरीर से पनेशिया के निदेशक का कोई लेना देना नहीं था। निदेशक की तहरीर पर भी मुकदमा होना चाहिए था।
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यह हुआ था

छात्रसंघ चौराहे पर स्थित पनेसिया हॉस्पिटल के मालिकाना हक को लेकर 22 जून को  विवाद हो गया था। इस दौरान भाजपा सांसद भी पहुंचे थे। दोनों पक्ष में विवाद होने पर पुलिस पहुंची थी। पुलिस ने दोनों पक्ष के आठ लोगों को धारा 107/ 116 में पाबंद करने के बाद थाने से से ही छोड़ दिया गया।

इस मामले में तीन लोगों ने तहरीर दी थी। एक पक्ष से निदेशक मंडल के संस्थापक सदस्य विजय पांडेय ने और दूसरी तरफ से निदेशक मंडल के सदस्य डा. प्रमोद सिंह तथा सांसद कमलेश पासवान ने तहरीर दी थी। रात में ही प्रशासन ने अस्पताल को सील कर दिया था।
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