धारा 147 : उपद्रव करना (सजा दो साल या अर्थदंड या दोनों)
धारा 504, 506 : गाली-गलौज, धमकी देना (सजा दो साल या जुर्माना या दोनों)
एससी, एसटी एक्ट : सजा छह माह से लेकर पांच साल और जुर्माना)
विजय पांडेय की तहरीर पर दर्ज केस में यह हो सकती है सजा
धारा 395: डकैती (सजा आजीवन कारावास या दस वर्ष कठिन कारावास और आर्थिक दंड)
147 : उपद्रव करना (सजा दो साल या अर्थदंड या दोनों)
323 : जानबूझ कर स्वेच्छा से चोट पहुंचाना (सजा एक साल कारावास या एक हजार रुपये जुर्माना या दोनों)
504, 506 : उकसाना, धमकी देना (सजा दो साल या जुुर्माना या दोनों)
352 : आपराधिक बल का प्रयोग (तीन साल या जुर्माना या दोनों)
पुलिस की कार्रवाई पर डॉ प्रमोद ने उठाए सवाल
पनेशिया हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. प्रमोद सिंह ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मामले में उनकी तरफ से तहरीर दी गई थी। विजय पांडेय सहित तमाम लोगों ने आकर मारपीट व गुंडागर्दी की। कैश काउंटर से 35 हजार रुपये लूटकर चले गए। इस मामले में पुलिस ने मुकदमा नहीं दर्ज किया। भाजपा सांसद की तहरीर से पनेशिया के निदेशक का कोई लेना देना नहीं था। निदेशक की तहरीर पर भी मुकदमा होना चाहिए था।
छात्रसंघ चौराहे पर स्थित पनेसिया हॉस्पिटल के मालिकाना हक को लेकर 22 जून को विवाद हो गया था। इस दौरान भाजपा सांसद भी पहुंचे थे। दोनों पक्ष में विवाद होने पर पुलिस पहुंची थी। पुलिस ने दोनों पक्ष के आठ लोगों को धारा 107/ 116 में पाबंद करने के बाद थाने से से ही छोड़ दिया गया।
इस मामले में तीन लोगों ने तहरीर दी थी। एक पक्ष से निदेशक मंडल के संस्थापक सदस्य विजय पांडेय ने और दूसरी तरफ से निदेशक मंडल के सदस्य डा. प्रमोद सिंह तथा सांसद कमलेश पासवान ने तहरीर दी थी। रात में ही प्रशासन ने अस्पताल को सील कर दिया था।