गोरखपुर। कैंट इलाके में रिटायर्ड महिला डॉक्टर मंजुला श्रीवास्तव को जालसाजों ने नौ दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा। 22 फरवरी को उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी के ''''मन की बात'''' कार्यक्रम में साइबर ठगी और उससे बचाव के उपायों के बारे में सुना तब जाकर उनको ठगी का अहसास हुआ। दो दिन बाद खाते में पैसा वापस नहीं होने पर उन्होंने पुलिस को सूचना दी।
जानकारी के अनुसार, 13 फरवरी को डॉक्टर के पास व्हाट्सएप पर एक अंजान नंबर से वीडियो कॉल आई थी। इसके बाद से जालसाजों ने खुद को एटीएस और एनआईए का अफसर बताया और बाद में मनी लॉन्ड्रिंग से उनका नाम जोड़कर डिजिटल अरेस्ट कर लिया। पीड़िता के मुताबिक, 13 से 21 फरवरी तक जालसाज लगातार वीडियो कॉल पर निगरानी करते रहे। 22 फरवरी को उन्होंने ''''मन की बात'''' कार्यक्रम में पीएम मोदी को सुना।
उन्होंने लोगों को चेतावनी दी थी कि ओटीपी, आधार नंबर या बैंक खाते की जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि डिजिटल ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और इसके चलते कई लोग, खासकर वरिष्ठ नागरिक, अपनी जीवनभर की कमाई खो बैठते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा था कि डिजिटल अरेस्ट जैसी धोखाधड़ी पर पहले भी व्यापक चर्चा हो चुकी है लेकिन फिर भी जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री ने उदाहरण देते हुए बताया था कि कोई व्यक्ति खुद को उच्च अधिकारी बताकर जानकारी मांग सकता है लेकिन ऐसे में सतर्क रहना बेहद जरूरी है। इसके बाद डॉक्टर को शक हुआ कि कहीं उनके साथ भी ठगी तो नहीं हो गई। जालसाजों ने आश्वासन दिया था कि 24 फरवरी तक उनके रुपये खाते में वापस आ जाएंगे लेकिन नहीं आए। अगले दिन उन्होंने थाने में शिकायत दर्ज कराई।