एसपी ने बताया कि 284 करोड़ से अधिक की जो संपत्तियां इस गिरोह ने अर्जित कीं, उनमें पंजाब के पठानकोट बस स्टैंड के पीछे दो करोड़ की जमीन, होशियारपुर में पचास लाख का फ्लैट, राजेंद्र पैलेस नई दिल्ली में दो करोड़ के छह कमरे, मानवाला अमृतसर में 46 एकड़ प्लाट करीब 200 करोड़ के, चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल एरिया 13 करोड़ का पेंट हाउस, फतेहपुर जिले के खागा तहसील के मंझनपुर 70 लाख का फ्लैट, आगरा जनपद के कार्यालय भवन में 90 लाख रुपये का फ्लैट, ग्वालियर राजस्थान में 30 करोड़ की जमीन, कोटा राजस्थान में 35 लाख की जमीन, बूंदी राजस्थान में 22 लाख की जमीन, गुजरात के अहमदाबाद में सवा करोड़ का ऑफिस, पंजाब के अमृतसर में छह करोड़ का चार मंजिला मकान, जनकपुरी विकास टावर दिल्ली में 56 लाख की संपत्ति, न्यू अमृतसर पंजाब में 70 लाख का कार्यालय भवन, बिहार के सिवान टोल प्लाजा में करीब डेढ़ करोड़ की तीन बीघा जमीन का पुलिस ने पता लगाया है।
इसके अलावा नेक्टर कामर्शियल एस्टेट लिमिटेड के नाम से गोरखपुर में चार करोड़ की कीमत का जीडीए टावर, मुंबई में डेढ़ करोड़ का कार्यालय भवन और राजस्थान के उदयपुर में 20 लाख रुपये का प्लाट का भी पता चला है। इसी तरह बाकी दो फर्म किम फ्यूचर विजन, हेल्प फाइनेंस कंपनी की संपत्ति को आरबीआई ने सील कर दिया है। उसका भी पता पुलिस ने लगाया है। एसपी के अनुसार, गिरफ्तार मनोज आदि ने जो धन फर्जी कंपनी से एकत्रित किया है, उसके बारे में डीजीपी को लिखा जा रहा है। उनके स्तर से कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाएगा।
एसपी हेमराज मीणा ने बताया कि वर्ष 1993 में कंपनी के डायरेक्टर ने किम इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी खोली थी। यह कंपनी ठीक से काम रही थी। उसी बीच कंपनी के डायरेक्टर की मौत हो गई और पूरा कारोबार उसके पुत्र रविंद्र सिंह सिद्धू के हाथों में आ गया। धन के लालच में उसने मनोज आदि को अपने साथ जोड़ा।
गोलमाल करने के बाद डायरेक्टर रविंद्र जेल चले गए। चूंकि कंपनी का नाम सुर्खियों में था। ऐसे में मनोज आदि ने उसे बदल कर नेक्टर कामर्शियल कर दिया। फिर गोलमाल कर फरार हो गए। दो साल के भीतर इन्हीं लोगों ने किम फ्यूचर विजन नामक कंपनी की नींव रख दी। इससे भी अकूत धन एकत्रित करने के बाद मनोज आदि ने उसे भी बंद कर हेल्प फाइनेंस नाम से नई कंपनी बनाई और गोलमाल का सिलसिला जारी रखा।