गोरखपुर के रामगढ़ताल में मछली पालन का ठेका लेने वाली फर्म पर 14 करोड़ रुपये के बकाये को लेकर टेंडर निरस्त करने की तैयारी शुरू हो गई है। वहीं इसकी सूचना मिलने पर समिति की बेचैनी बढ़ गई है। समिति का कहना है कि इसी सप्ताह बकाया जमा करा दिया जाएगा।
एक अप्रैल 2019 को मत्स्यजीवी सहकारी समिति लिमिटेड रामगढ़ उर्फ महेरवा की बारी, कूड़ाघाट को 22.79 करोड़ में रामगढ़ताल में मछली पकड़ने का ठेका मिला था। अनुबंध के तहत समिति 28 जून 2024 तक मछली पकड़ सकती है। अनुबंध में प्राधिकरण ने समय-समय पर एक निश्चित राशि भी जमा करने की शर्त लगाई है।
समिति को तीन साल में पूरी रकम यानी 22.79 करोड़ रुपये जमा करना है। इसके पहले जो ठेका हुआ था वह सिर्फ 2.60 करोड़ का ही था। पांच साल बाद 2019 में जब मछली पकड़ने के लिए ठेका हुआ तो सर्वाधिक बोली 22.79 करोड़ तक पहुंच गई थी।
जीडीए के मुताबिक ठेका पानी वाली फर्म ने अब तक सिर्फ 5 करोड़ 19 लाख 69 हजार रुपये ही जमा किए हैं जबकि उसपर 14 करोड़ रुपये का बकाया है। इसे लेकर प्राधिकरण ने समिति को नोटिस दे रखा है।
इसके बाद हरकत में आए समिति के पदाधिकारियों ने जल्द रकम जमा करने का दावा किया है। उन्होंने जीडीए के अफसरों से भी संपर्क कर यह जानकारी दी है। हालांकि प्राधिकरण के सचिव राम सिंह गौतम का कहना है कि समय से बकाया रकम नहीं जमा हुई तो कार्रवाई होगी।
कूड़ाघाट मत्स्यजीवी सहकारी समिति लिमिटेड रामगढ़ उर्फ महेरवा की बारी के सचिव सुनील निषाद ने कहा कि मार्च, अप्रैल और मई में ही मछली का प्रजनन होता है। उसी दौरान लॉकडाउन हो गया। गाड़ियों का संचालन आदि सब बंद हो गया। करीब आठ महीने तक तो मछली पकड़ने का काम पूरी तरह ठप रहा है। बारिश के मौसम में इतनी बरसात हुई कि ताल से मछलियां भी बह गईं। बहुत नुकसान हुआ। बहुत जतन के बाद ठेका मिला है। समिति इसी सप्ताह जीडीए का बकाया जमा कर देगी।