जांच में टीम को कई बिल बुक ऐसे मिले, जिस पर इनवाइस नंबर ही प्रिंट नहीं था। इसके बावजूद बिक्री की जा रही थी। जांच टीम के मुताबिक व्यापारी अपनी सुविधानुसार 50 हजार रुपये से कम के बिल काट कर जारी कर देते हैं, ताकि ई-वे बिल जारी न करना पड़े।
जीएसटी के नियमों का उल्लंघन
करोड़ों रुपये का टर्नओवर करने वाली दोनों फर्मों ने जीएसटी के नियमानुसार कोई भी स्टॉक डिटेल, लेजर, कैशबुक मेंटेन नहीं किया था। अधिकारियों ने कर चोरी के आरोप में स्टॉक का सत्यापन करवाने के बाद करीब 48 लाख रुपये का पेंट सीज किया है। एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-2 राजेश सिंह ने बताया कि व्यापारी के रिटर्न टैक्स की डिटेल और बाकी डाटा भी ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ाई जाएगी।
जांच टीम में ये लोग थे शामिल
जांच टीम में ज्वाइंट कमिश्नर एसआईबी रमेश दुबे, डिप्टी कमिश्नर एसआईबी रेंज ए श्याम नारायण यादव, डिप्टी कमिश्नर एसआईबी रेंज बी सच्चिदानंद सिंह, सचल दल की तीन टीमों सहित सेक्टर के कई अधिकारी व कर्मचारी शामिल थे।
वाणिज्य कर विभाग के एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-1 बाबू लाल ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद दोनों फर्म की जांच की गई है। जांच में एसआईबी टीम के अलावा मूल्यांकन करने वाले विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया था। शुरुआती जांच में कर चोरी के सुबूत मिले हैं। स्टॉक संबंधी जानकारी लेते हुए सारे दस्तावेज जब्त कर लिए गए हैं। सारे दस्तावेज और उनके स्टॉक का मिलान किया जाएगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।