कोल इंडिया लिमिटेड लगवाएगा 20 मेगावाट क्षमता का ग्रिड कनेक्टेड सोलर पॉवर प्लांट
- सासंद रवि किशन ने भी की थी पहल, 140 करोड़ रुपये की आएगी लागत, टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में
गोरखपुर। चिलुआताल आने वाले दिनों में सिर्फ पर्यटन स्थल ही नहीं बल्कि सोलर एनर्जी (सौर ऊर्जा) के बड़े उत्पादन केंद्र के रूप में भी जाना जाएगा। ताल की लहरों पर फ्लोटिंग सोलर पॉवर प्लांट लगाया जाएगा। गोरक्षनगरी को सोलर सिटी बनाने के क्रम में कोल इंडिया लिमिटेड ग्रिड कनेक्टेड सोलर पॉवर प्लांट लगाने जा रहा है। 20 मेगावाट क्षमता के फ्लोटिंग सोलर पॉवर प्लांट को स्थापित करने में 140 करोड़ रुपये की लागत आएगी। सांसद रवि किशन ने भी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सोलर पॉवर प्लांट लगवाने के लिए पहल की थी।
मुख्यमंत्री ने चिलुआताल को भी सौर ऊर्जा उत्पादन के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया था। चिलुआताल में पानी की सतह पर फ्लोटिंग पॉवर प्लांट की स्थापना कारगर सिद्ध हो सकता है। वहीं, सांसद रवि किशन ने सीएम को लिखे पत्र में बताया था कि चिलुआताल में 1357 एकड़ जलक्षेत्र उपलब्ध है, जहां फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट स्थापित करने की पर्याप्त संभावना है।
परियोजना के मुताबिक, कोल इंडिया लिमिटेड चिलुआताल की लहरों पर 20 मेगावाट की क्षमता के फ्लोटिंग सोलर पैनल लगवाएगा। इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया चल रही है 17 मार्च को टेंडर फाइनल होगा। चिलुआताल में फ्लोटिंग सोलर पैनल ऐसे स्पेशल फाइबर पर लगाए जाएंगे जो पानी में खराब नहीं होंगे। इस परियोजना के तहत प्रतिवर्ष 38.54 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। फ्लोटिंग सोलर पॉवर प्लांट की कंट्रोल यूनिट हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) की चहारदीवारी के समीप बनाई जाएगी। डीएम दीपक मीणा ने बताया कि चिलुआताल में फ्लोटिंग सोलर पॉवर प्लांट की स्थापना से पर्यावरण संरक्षण के साथ ऊर्जा की आवश्यकताओं को पूरा करने में काफी मदद मिलेगी।
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रामगढ़ताल की तर्ज पर हुआ कायाकल्प
शहर के उत्तरी छोर पर स्थित चिलुआताल कभी उपेक्षित दशा में था लेकिन अब नया पर्यटन स्थल बन गया है। इसके घाट का सौंदर्यीकरण, रामगढ़ताल की तर्ज पर कराया गया है। चिलुआताल के कायाकल्प पर सरकार ने 20.39 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।