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विश्व दिव्यांग दिवस: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर की इरफाना तारिक और धीरज श्रीवास्तव को करेंगे सम्मानित

Fri, 03 Dec 2021 10:15 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

इरफाना दृष्टि बाधित बच्चों की शिक्षा-स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य कर रहीं हैं। वहीं पूर्ण बधिर धीरज श्रीवास्तव बीते सात वर्ष में अनेक विद्यार्थियों को आईटी क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना चुके हैं।
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इरफाना तारिक और धीरज श्रीवास्तव। - फोटो : अमर उजाला।
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विश्व दिव्यांग दिवस (तीन दिसंबर) पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिव्यांगजनों की शिक्षा-स्वास्थ्य की दिशा में उल्लेखनीय कार्य करने के लिए शहर की इरफाना तारिक और दिव्यांगता को चुनौती देने वाले धीरज श्रीवास्तव को शुक्रवार को लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में सम्मानित करेंगे। इरफाना ने दृष्टि बाधित बच्चों के लिए बोलता पुस्तकालय स्थापित किया है। वहीं, धीरज ने पूर्ण बधिर होने के बावजूद अनेक विद्यार्थियों को कंप्यूटर व सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया है।

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जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी संदीप मौर्य के अनुसार इरफाना तारिक, बनकटीचक की रहने वाली हैं। वह, दृष्टि बाधित बच्चों के लिए ब्लाइंड चाइल्ड एजुकेशन एंड हैंडीकैप्ड डेवलपमेंट सोसायटी नामक संस्था चलाती हैं। दृष्टि बाधित बच्चों की शिक्षा को आसान बनाने के लिए उन्होंने वर्ष 2013 में पूर्वांचल का पहला बोलता पुस्तकालय स्थापित किया। इस पुस्तकालय में विभिन्न कक्षाओं के पाठ्यक्रम ऑडियो में उपलब्ध हैं। बच्चों के व्यक्तित्व विकास के लिए विश्व साहित्य भी ध्वनि रूप में उपलब्ध है।

इसके अलावा इरफाना दृष्टि बाधित बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, शारीरिक-मानसिक विकास से जुुड़े कार्य लगातार कर रहीं हैं। अपने उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें पहले भी राज्य और जनपद स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उन्हें गैर व्यावसायिक श्रेणी में दिव्यांगजनों के लिए कार्यरत सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति पुरस्कार से सम्मानित करेंगे।
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वहीं खरैयापार पोखरा, बशारतपुर निवासी धीरज श्रीवास्तव पूर्ण रूप से बधिर हैं। इससे उन्हें बचपन से ही बोलने-सुनने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। सौ फीसदी दिव्यांगता के बावजूद उन्होंने स्नातक के साथ ही व्यावसायिक शिक्षा भी प्राप्त की। बीते सात वर्ष से धीरज एनआईआईटी कंप्यूटर इंस्टीट्यूट गोरखपुर में सैकड़ों विद्यार्थियों को कंप्यूटर एप्लिकेशन, ऑपरेटिंग सिस्टम, कंप्यूटर ऑपरेटर, डाटा इंट्री सहित सूचना प्रौद्योगिकी की शिक्षा देकर आत्मनिर्भर बना रहे हैं।

उनकी जिजीविषा के कारण ही उन्हें दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की ओर से 2021 के श्रवण बाधित 100 प्रतिशत श्रेणी में राज्य स्तरीय प्रेरणास्रोत पुरस्कार के लिए चुना गया है। यही नहीं राज्य सरकार की ओर से उनका नाम 2022 में पद्मश्री पुरस्कार के लिए भारत सरकार को प्रस्तावित किया गया है। धीरज, अंतरराष्ट्रीय स्तर की माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी संस्थाओं की कठिन परीक्षाओं में पहले ही प्रयास में सफलता प्राप्त कर चुके हैं।

दिव्यांगों के लिए संचालित हैं ये योजनाएं

जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी संदीप मौर्य ने बताया कि दिव्यांगजनों के लिए दिव्यांग पेंशन, कुष्ठावस्था पेंशन योजना, दुकान निर्माण संचालन ऋण योजना और शादी-विवाह प्रोत्साहन पुरस्कार योजना संचालित हैं। अभ्यर्थी ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं। इसके लिए मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा निर्गत दिव्यांग प्रमाणपत्र, आधार कार्ड की प्रति, ग्रामसमा का प्रस्ताव लगाना अनिवार्य है। आय प्रमाणपत्र ग्रामीण क्षेत्र के लिए 45080 रुपये एवं शहरी क्षेत्र के लिए 56460 रुपये वार्षिक से अधिक नहीं होना चाहिए। जन्म प्रमाणपत्र के रूप में हाईस्कूल का प्रमाणपत्र अथवा परिवार रजिस्टर की नकल भी लगा सकते हैं।

दुकान निर्माण संचालन ऋण अनुदान योजना

इस योजना का लाभ पाने के लिए दिव्यांग व्यक्ति को http/divyangjandukan.upsdc.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदक की आयु 18 वर्ष से कम तथा 60 वर्ष से अधिक न हो। फॉर्म में आधार कार्ड, पहचान पत्र, के रूप में यूडीआईडी कार्ड स्वप्रमाणित के साथ अन्य अनिवार्य प्रमाणपत्र लगाने होंगे। अभ्यर्थी का आय प्रमाणपत्र जो ग्रामीण क्षेत्र में 92160 रुपये एवं शहरी क्षेत्र में 112920 रुपये वार्षिक से अधिक का नहीं होना चाहिए।

शादी विवाह प्रोत्साहन पुरस्कार योजना

इसके लिए http/divyangjan.upsdc.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। योजना का लाभ पाने के लिए अभ्यर्थी को रजिस्ट्रार द्वारा जारी विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र (शादी दो वर्ष से अधिक की न हुई हो) युवक एवं युवती का आधार कार्ड/पहचान पत्र संलग्न करना होगा। इसके साथ अधिवास प्रमाणपत्र स्वप्रमाणित, आय प्रमाणपत्र (तहसील द्वारा निर्गत पति-पत्नी में कोई आयकर दाता न हो) और दिव्यांग प्रमाणपत्र मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा निर्गत (40 प्रतिशत से कम न हो) संलग्न करने होंगे। योजना का लाभ उन जोड़ों को ही मिलेगा जिनमें शादी के समय युवक की उम्र 21 वर्ष से कम तथा 45 वर्ष से अधिक न हो तथा युवती की उम्र 18 वर्ष से कम एवं 45 वर्ष से अधिक न हो।
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