विश्वविद्यालय में वानिकी एवं औद्यानिकी, वन्यजीव संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, एग्रोफॉरेस्ट्री, फल एवं बागवानी सहित कई आधुनिक विषयों में अध्ययन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। यहां स्नातक (बीएससी), परास्नातक (एमएससी), पीएचडी और डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे।
उत्तर प्रदेश का पहला वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय दो साल में बनकर तैयार होगा। करीब 50 हेक्टेयर (123.55 एकड़) क्षेत्रफल में विकसित होने वाले इस विश्वविद्यालय के निर्माण पर 491 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आने का अनुमान है। प्रशासन और वन विभाग मुख्यमंत्री के हाथों विश्वविद्यालय का शिलान्यास कराने की तैयारियों में जुटे हैं।
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इस विश्वविद्यालय का निर्माण गोरखपुर के कैंपियरगंज क्षेत्र के भारीबैसी में किया जाएगा। विश्वविद्यालय की स्थापना के साथ गोरखपुर के शैक्षणिक परिदृश्य को नया विस्तार मिलेगा। यह चार राज्य विश्वविद्यालयों सहित कुल पांच विश्वविद्यालयों वाले चुनिंदा जिलों में शामिल हो जाएगा।
प्रभागीय वनाधिकारी शुभम सिंह के अनुसार, विश्वविद्यालय में वानिकी एवं औद्यानिकी, वन्यजीव संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, एग्रोफॉरेस्ट्री, फल एवं बागवानी सहित कई आधुनिक विषयों में अध्ययन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। यहां स्नातक (बीएससी), परास्नातक (एमएससी), पीएचडी और डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे।
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विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को वन, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े क्षेत्रों में उच्च शिक्षा एवं शोध के अवसर उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही किसानों और छात्रों को आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण देने तथा कृषि एवं पर्यावरण संबंधी अनुसंधान को बढ़ावा देने पर भी जोर रहेगा।