महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के प्रबंधक एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कोरोना संकट के इस दौर में परिषद की सभी शैक्षणिक संस्थाओं की भूमिका बढ़ गई है। वर्तमान चुनौतियों का सामना करते हुए अत्याधुनिक तकनीकों का प्रयोग करने के साथ ही सामाजिक जन-जागरण करें। नवाचारों का प्रयोग करें। अत्याधुनिक तकनीक उपयोग में लाएं। संस्थाएं प्रवेश में ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाएं।
गोरखनाथ मंदिर में सोमवार को मुख्यमंत्री परिषद के सदस्यों और संस्थाध्यक्षों को संबोधित कर रहे थे। योगी ने कहा कि परिषद की संस्थाओं का मूल उद्देश्य सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्र के लिए समर्पित युवाओं को तैयार करना है। संस्थाएं विद्यार्थियों, अभिभावकों के माध्यम से कोरोना से बचाव के उपायों पर आम जनता को जागरूक करें।
इस कार्य के लिए जन-जागरण अभियान भी चलाएं। शारीरिक दूरी और कोरोना से बचाव संबंधित सभी उपायों को ध्यान में रखते हुए हम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की योजना बनाएं और उसे इस सत्र से लागू करें। विविध तकनीक जो विद्यार्थी को घर में ज्ञान प्रदान करने के माध्यम बन सकते हों, उसे विकसित करें। हमें वर्तमान युग की चुनौतियों को स्वीकार करते हुए ज्ञान-विज्ञान के नए-नए रास्ते सुझाने और अपनाने भी होंगे। उन्होंने शिक्षण-प्रशिक्षण के लिए तकनीकों के उपयोग की जानकारी भी ली।
परिषद के अध्यक्ष एवं पूर्व कुलपति प्रो. यूपी सिंह ने कहा कि सभी संस्थाएं अपने संस्थापकों द्वारा तय किए गए उद्देश्यों को पूरा करने का पूर्ण प्रयत्न कर रहे हैं और भविष्य में भी करेंगे। बैठक में रामजन्म सिंह, प्रमथनाथ मिश्र, डॉ. एसपी सिंह, डॉ. प्रदीप राव, प्रो. सुमित्रा सिंह, डॉ. अरूण कुमार सिंह, कृष्णा चटर्जी, पंकज कुमार, मनीष दूबे, डॉ. हरेंद्र यादव, केशव त्रिपाठी, सरिता सिंह, डीएस अजिथा, वंदना त्रिपाठी, सपना सिंह, डॉ. संजय त्रिपाठी, डॉ. अरविंद चतुर्वेदी, पाटेश्वरी सिंह, डॉ. आरपी सिंह, डॉ. बसंत नारायण सिंह आदि मौजूद रहे।