मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं में अनुशासित परिसर संस्कृति को सदैव प्राथमिकता पर रखा है। परिषद की संस्थाओं ने इस मामले में अनुकरणीय प्रयास किया है। परिसर में अनुशासन की भावना के साथ, स्वच्छता, हरियाली तथा सबका सबके प्रति सद्भाव रहे, इसका नियमित पर्यवेक्षण करना सभी संस्थाध्यक्षों की जिम्मेदारी है। उन्होंने शिक्षा संस्थाओं में पठन-पाठन और उपलब्ध सुविधाओं की गुणवत्ता में किसी भी तरह की कोताही न बतरने के निर्देश भी दिए। साथ ही कहा कि समय के साथ चलने और आगामी समय से तालमेल बैठाने के लिए शोध एवं नवाचार आज की मांग है। शिक्षा परिषद की संस्थाओं ने शोध औए नवाचार को लेकर जो प्रयास किए हैं, वे सराहनीय हैं। शोध व नवाचार को लेकर सतत ध्यान देते रहने की आवश्यकता है। उन्होंने सभी संस्थाओं में प्रयोगशाला और पुस्तकालय को समृद्ध करने तथा ई लाइब्रेरी की ओर अग्रसर होने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर उन्होंने शिक्षा परिषद की संस्थाओं की सामाजिक सहभाग की भी समीक्षा की। यह जाना कि सालभर में किस संस्था ने समाज के बीच जाकर किस तरह अपने सामाजिक सरोकारों को निभाया। उन्होंने कहा कि हर संस्था की जिम्मेदारी बनती है कि वह समाज की उन्नति के लिए, लोगों को स्वावलंबी बनाने के लिए अपने दायरे को बढ़ाए। सीएम ने इस बात पर प्रसन्नता जताई कि परिषद की संस्थाओं ने लगातार अलग-अलग आयामों से जुड़कर समाज की चिकित्सा, शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण तथा स्वावलंबन के लिए अनवरत कार्यों की श्रृंखला को बनाए रखा है।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं की कार्यपद्धति पर भी विमर्श किया। सभी संस्थाओं की कार्यपद्धति की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि उत्कृष्टता में भी परिमार्जन की गुंजाइश हमेशा रहती है। सीएम ने कहा कि शिक्षा से जुड़ी संस्थाएं विद्यार्थी केंद्रित प्रणाली का निरंतर उन्नयन करती रहें। जो भी कार्य हों, उनमें सेवा की भावना सर्वोपरि होनी चाहिए।
शताब्दी वर्ष को भव्य व ऐतिहासिक बनाने की अभी से शुरू करें तैयारी : सीएम योगी
समीक्षा और भावी कार्ययोजना को लेकर हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के शताब्दी वर्ष 2032 को भव्य तथा ऐतिहासिक बनाने के लिए अभी से तैयारी शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना 1932 में पूर्वी उत्तर प्रदेश में शैक्षिक पुनर्जागरण और राष्ट्रीय मूल्यों के संरक्षण को लेकर की गई थी। यह परिषद अपने संस्थापक युगपुरुष ब्राह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ महाराज तथा विस्तारक राष्ट्रसंत ब्राह्मलीन महंत अवेद्यनाथ महाराज के मूल्यों, आदर्शों को संजोते हुए निरंतर प्रगतिमान है। सात साल बाद यह अपनी यात्रा के शताब्दी वर्ष में होगी। शताब्दी वर्ष तक हमें परिषद की संस्थाओं को एक प्रतिमान के रूप में स्थापित करना है। इसके लिए सभी संस्थाओं के प्रमुख को एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार करके अभी से जुट जाना होगा।