परिवार के साथ मधुलिका मिश्रा।
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मधुलिका मिश्रा ने कहा था कि किसान परिवार की इकलौती बेटी हूं। मेरी मां की मौत बचपन में हो गई थी। पिता राकेश चंद्र मिश्र कृषि कार्य करते हैं। दो भाई हैं, जो पढ़ाई के साथ-साथ कृषि कार्य में पिता का सहयोग करते हैं। पिता की बदौलत बीएड द्वितीय वर्ष में पढ़ाई कर रही हूं।
अचानक सांस लेने में तकलीफ हुई तो भाई ने गोरखपुर के एक निजी अस्पताल में दिखाया। डॉक्टर ने जांच के बाद बताया कि वाल्व खराब है। इसके बाद भाई मेंदाता अस्पताल लखनऊ लेकर गए।
जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि दोनों वाल्व खराब हैं, जिसे बदलना पड़ेगा। इसका खर्च नौ लाख रुपये आएगा। किसान परिवार होने के नाते इतने रुपये नहीं है कि मेरे घरवाले मेरे दोनों वाल्व बदलवा दें। इसकी जानकारी मुख्यमंत्री को मिली तो उन्होंने तत्काल मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से धनराशि स्वीकृत कर दी।
साथ ही मधुलिका के पिता राकेश चंद्र मिश्र को पत्र भेजकर शुभकामना दी। कहा कि ऑपरेशन के बाद बेटी ठीक होगी, फिर आगे की पढ़ाई पूरी कर सकेगी। मुख्यमंत्री की दरियादली से राकेश चंद्र मिश्र व उनका पूरा परिवार गदगद है।
उनका कहना है कि बेटी के लिए मुख्यमंत्री भगवान बनकर आए हैं। नौ लाख 90 हजार रुपये की धनराशि बहुत बड़ी होती है। खेत बेचकर भी इतनी धनराशि नहीं जुटाई जा सकती थी। मुख्यमंत्री के सदैव आभारी रहेंगे। मधुलिका ने भी मुख्यमंत्री का आभार जताया है।