गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को दिव्यांगजनों की पेंशन धनराशि में जल्द एक बार फिर बढ़ोतरी की घोषणा की। उन्होंने कहा कि शारीरिक चुनौती प्रतिभा की राह में बाधा नहीं बन सकती। प्रतिभा को दया नहीं, अवसर की जरूरत है। सही साधन और प्रशिक्षण मिले तो दिव्यांगजन अपनी क्षमता की ऊंचाई तक पहुंच सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने गोरखपुर क्लब में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग और हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड की ओर से आयोजित कार्यक्रम में 509 लाभार्थियों को 664 सहायक उपकरण वितरित किए। इनमें मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल, ई-ट्राइसाइकिल, स्मार्टकेन, ब्रेल किट, हियरिंग एड, स्मार्टफोन और कृत्रिम अंग शामिल हैं। उपकरणों की कीमत करीब सवा करोड़ रुपये बताई गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति और असली पहचान ऊंची इमारतों से नहीं होती। समाज की प्रगति उस व्यवस्था में होती है, जहां शासन की योजनाओं का लाभ बिना भेदभाव, अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक मजबूती से पहुंचता है। यही सुशासन का पहला सूत्र है। सरकार का लक्ष्य हर व्यक्ति को स्वावलंबी बनाना और सबके जीवन में खुशहाली लाना है। उन्होंने बताया कि पहले दिव्यांगजन को 300 रुपये पेंशन मिलती थी, जिसे बढ़ाकर 500 और फिर 1000 रुपये किया गया। अब कुछ दिनों में इसमें फिर बढ़ोतरी की जाएगी।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2026-27 में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में शिविर लगाकर पेंशन से छूटे दिव्यांगजनों को योजनाओं से जोड़ने का लक्ष्य है। प्रदेश में 17 लाख से अधिक दिव्यांगजनों की डिजिटल पहचान मजबूत कर उन्हें कार्ड उपलब्ध कराए गए हैं। सभी 18 मंडलों में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। गोरखपुर में सीतापुर आई हॉस्पिटल परिसर में केंद्र शुरू हो चुका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिव्यांगजन सशक्तीकरण की शुरुआत बचपन से होनी चाहिए। शुरुआती जांच, थेरेपी, विशेष शिक्षा और तकनीकी सहायता पर सरकार जोर दे रही है। तीन से सात वर्ष के दिव्यांग बच्चों के लिए बचपन डे केयर सेंटरों का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने दिव्यांगजनों को स्वरोजगार और रोजगार से जोड़ने के लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने पर भी जोर दिया।