लॉकडाउन से उपजी तकलीफों पर चर्चा से माहौल बोझिल न हो जाए, इसलिए अगले ही पल मुख्यमंत्री ने ट्रैक से हटकर सवाल किया कि पत्नी क्या करती है, तो सुनील ने बताया कि वह समूह से जुड़ कर सिलाई करती हैं। पार्लर भी चलाती हैं। 4 से 5 हजार रुपये मासिक आमदनी हो जाती है।
तब मुख्यमंत्री ने ऐसा सवाल किया कि वीडियो कांफ्रेंसिंग से जुड़ा हर कोई हंस पड़ा। सवाल था- ‘तुम दोनों झगड़ते तो नहीं हो।’ सुनील ने भी मुस्कुराते हुए कहा नहीं-नहीं। सीएम ने कहा ठीक है। साथ मिल कर काम करो और आगे बढ़ो।
वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान सीडीओ हर्षिता माथुर, उपायुक्त स्वत: रोजगार अवधेश राम, जिला मिशन प्रबंधक सचिन कुमार समेत कई अन्य समूह की महिलाएं भी मौजूद रहीं।
वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान मुख्यमंत्री ने चरगांवा ब्लाक की सोनबरसा ग्राम निवासी उजाला समूह की अध्यक्ष रीता देवी से भी बात की। रीता से उनके काम काज की जानकारी पूछी तो उन्होंने बताया कि उनके समूह में 11 महिलाएं काम करती हैं जिनमें अधिकांश के पति प्रवासी मजदूर हैं।
लॉकडाउन में उन्होंने मास्क भी बनाया और मुनाफा भी कमाया। सीएम ने उनके प्रयास को खूब सराहा और मुस्कुराते हुए कहा कि ‘कितना अच्छा है, आप लॉकडाउन में मुनाफा कमा रही हैं। हमें तो सिर्फ घाटा ही हो रहा है।’ सीएम की बात से वहां बैठा हर कोई मुस्कुरा उठा।
मुख्यमंत्री ने बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट सखी योजना की घोषणा करते हुए बताया कि इनमें गांव की महिलाएं बैंकों से जुड़ कर पैसे के लेनदेन को घर-घर जाकर करवाएंगी। बैंक जाने की आवश्यकता ही नहीं होगी। ये सारा लेनदेन डिजिटल होगा। इससे कोरोना संक्रमण का खतरा तो कम होगा ही, साथ में गांव की महिलाओं को रोजगार भी मिलेगा।
सीएम ने कहा कि 58 हजार बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट सखी नियुक्त की जाएंगी। इन्हें 4 हजार रुपए महीने के हिसाब से 6 महीनों तक प्रदान किए जाएंगे। डिवाइस के लिए भी 50 हजार रुपए मिलेंगे। इसके अलावा बैंक भी लेनदेन पर उनको कमीशन देगा, जिससे उनको हर महीने एक निश्चित आय होगी।