मुख्यमंत्री ने कहा कि जल निकासी के लिए मिलकर कर कार्य करना होगा। नगर निगम को शहरी क्षेत्र के सभी वाटर पंपों की क्षमता बढ़ानी होगी। तरकुलानी रेगुलेटर का काम अगले मानसून से पहले पूरा हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि रामगढ़ ताल को सिल्ट मुक्त किया जाए। इससे रामगढ़ ताल के आसपास जलभराव की समस्या खत्म हो जाएगी।
सर्वे पर खर्च हुए आठ करोड़ रुपये
लेडार सर्वे पर जीडीए और नगर निगम ने करीब आठ करोड़ रुपये खर्च किए हैं। सर्वे की जिम्मेदारी जियोनो कंपनी को दी गई है। कंपनी ने मास्टर ड्रेनेज प्लान के लिए हेलीकाप्टर के जरिए लेडार मैपिंग का काम किया है।
शहर में 200 स्थानों पर होता है जबरदस्त जलभराव
नगर निगम ने जलभराव वाले 200 से अधिक स्थानों को चिह्नित किया है। इसके मुताबिक नाले-नालियों की लंबाई, चौड़ाई व ढलान में तकनीकी खामियां हैं। इस वजह से पानी का बहाव बाधित होता है। मानसूनी बारिश में अधिकतर मुहल्लों में कई-कई दिन तक पानी भरा रहता है। जलभराव से स्थायी निदान के लिए लेडार तकनीक से प्लान तैयार करने का निर्णय लिया गया था।
लेडार मैपिंग करने वाली कंपनी को सर्वेक्षण, मैपिंग, डिजाइनिंग, परियोजना रिपोर्ट और टेंडर डाक्यूमेंट बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस तकनीक में सर्वे, लेजर उपकरणों से किया गया है। लेडार मैपिंग में जीपीएस और स्कैनर का भी सहयोग लिया गया है। तकनीक, टोपोग्राफिक और बैथीमेट्रिक तकनीक पर आधारित है। टोपोग्राफिक तकनीक में इंफ्रारेड लेजर का उपयोग कर गहराई और दूरी की रिपोर्ट तैयार की जाती है। जबकि, बैथीमेट्रिक तकनीक से जलाशय की गहराई तथा उसमें सिल्ट (मिट्टी, बालू) की मात्रा नापी जा सकती है।
लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग तकनीक (लेडार) सर्वे की अत्याधुनिक प्रक्रिया है। सर्वेक्षण कर डिजिटल थ्री डी चित्रों के जरिए संरचना का एकदम सही अंदाजा लगाया जा सकता है। इससे जमीन की बनावट, सतह की ऊंचाई, पेड़-पौधों का फैलाव और क्षेत्रफल का सही अनुमान लगा कर प्लानिंग की जा सकती है।
राइट्स करेगी शहरी क्षेत्र के सड़कों की जांच
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि त्वरित आर्थिक विकास के तहत नगर निकाय एवं नगर निगम क्षेत्र में सड़कों के जो कार्य हो रहे हैं, उसकी गुणवत्ता की जांच राइट्स संस्था से कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में किसी प्रकार का समझौता न हो।