फर्जी व कूट रचित दस्तावेज के आधार पर सरकारी धन गबन करने के जुर्म में विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तनु भटनागर ने उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड आजमगढ़ के तत्कालीन लिपिक सूर्यनाथ सिंह को पांच साल के कठोर कारावास एवं एक लाख 50 हजार रूपये अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड न देने पर अभियुक्त को तीन साल का कारावास अलग से भुगतना होगा।
अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक प्रमेश राम त्रिपाठी का कहना था कि अभियुक्त सूर्यनाथ सिंह ने वर्ष 1985-1986 व 1986-1987 में अपने कार्यालय के तत्कालीन सहयोगियों के साथ मिलकर ग्रामोद्योग के विकास के लिए ऋण एवं अनुदान के वितरण के लिए फर्जी एवं कूट रचित दस्तावेज तैयार कर उद्यमियों, अस्तित्वहीन व्यक्ति के नाम से यूनियन बैंक चौक आजमगढ़ से निकाला। इस प्रकार अभियुक्त ने षड़यंत्र कर सरकारी धन का गबन किया। कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाया।