गोरखपुर विश्वविद्यालय संबद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघ (गुआक्टा) के आह्वान पर सोमवार को कुलपति का घेराव करने प्रशासनिक भवन पर पहुंचे शिक्षकों और प्रशासनिक अधिकारियों में जमकर नोकझोंक हुई। विश्वविद्यालय प्रशासन ने दोनों प्रवेश द्वार को बंद करा दिया। इस दौरान छात्र-कर्मचारी अंदर ही फंस गए।
दिवाल फांदकर अंदर पहुंचे शिक्षकों ने प्रशासनिक भवन पर करीब तीन घंटे तक धरना दिया। बाद में एक जून से क्रमिक अनशन शुरू करने का निर्णय लिया। महाविद्यालयों में परीक्षा का बहिष्कार करके विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन पर सुबह 11 बजे से शिक्षक पहुंचने लगे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने दोनों मुख्य द्वार को बंद कर दिया।
गुआक्टा के कुछ पदाधिकारी, मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गए। कुछ देर बाद और शिक्षक पहुंच गए और विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से पहुंचे प्रो. एके सिंह से तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। शिक्षक इसी बीच दीवार फांदकर अंदर घुस गए और धरना शुरू कर दिया। कुलपति के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
अध्यक्ष डॉ. केडी तिवारी और महामंत्री डॉ. धीरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि कुलपति प्रो. राजेश सिंह शिक्षकों को लगातार अपमानित कर रहे हैं। शोध छात्रों का अकादमिक कॅरियर बर्बाद कर रहे हैं। अब तक महाविद्यालय के स्नातक शिक्षकों को शोध निर्देशक नहीं बनाया गया और न ही शिक्षकों की प्रोन्नति के लिए विशेषज्ञ दिए गए।
इस अवसर पर डॉ. अनूप श्रीवास्तव, डॉ. लोकेश त्रिपाठी, डॉ. वाचस्पति द्विवेदी, डॉ. अमृतांशु शुक्ला, निरंकार त्रिपाठी, डॉ. अजय कुमार मिश्र, डॉ. सूरज प्रकाश गुप्ता, डॉ. विनीत पांडेय, डॉ. विनय कुमार रावत, डॉ. समरेंद्र शर्मा, डॉ. रवि पांडेय, कृष्ण कुमार जायसवाल, डॉ. बीके सिंह, डॉ. सुरेश त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।