फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Gorakhpur News: हवा साफ करने के दावे हवा-हवाई, गोरखपुर 17 पायदान लुढ़का

विज्ञापन
विज्ञापन
- पांचवें से 22वें स्थान पर पहुंचा शहर, 170 अंक में सिमटे प्रयासों के नतीजे
विज्ञापन

- कई एयर प्यूरीफायर बंद, सड़क की धूल और कचरा जस का तस
- आखिर कहां हुई चूक, नगर निगम के दावों पर उठे सवाल

गोरखपुर। शहर की हवा सुधारने के लिए योजनाएं और संसाधन लगाने का दावा करने वाले नगर निगम के सामने स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 ने आईना रख दिया है। तीन से 10 लाख आबादी वाले शहरों की श्रेणी में गोरखपुर पांचवें स्थान से सीधे 22वें पायदान पर पहुंच गया। शहर को महज 170 अंक मिले। एक साल में 17 पायदान की यह गिरावट बताती है कि प्रदूषण नियंत्रण के दावों और जमीन पर उनके असर के बीच बड़ा अंतर है।
नगर निगम सड़क की धूल नियंत्रित करने, कचरा प्रबंधन सुधारने, हरित क्षेत्र बढ़ाने और यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने के उपायों का दावा करता रहा है। सवाल यह है कि इन तमाम प्रयासों का असर रैंकिंग में क्यों नहीं दिखा। अगर व्यवस्थाएं प्रभावी थीं तो गोरखपुर एक साल में 17 पायदान नीचे कैसे पहुंच गया।
विज्ञापन

प्रदूषण नियंत्रण के लिए शहर के अलग-अलग हिस्सों में लगाए गए एयर प्यूरीफायर भी नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। कई स्थानों पर ये उपकरण बंद पड़े हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब लगाए गए उपकरणों की नियमित निगरानी और रखरखाव तक नहीं हो पा रहा तो उनसे प्रदूषण कम करने की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
शहर में सड़क की धूल प्रदूषण का बड़ा कारण है, लेकिन कई इलाकों में धूल नियंत्रण की व्यवस्था प्रभावी नजर नहीं आती। कचरा प्रबंधन और यातायात व्यवस्था की स्थिति भी पूरी तरह संतोषजनक नहीं है। दूसरी ओर नगर निगम लगातार वायु गुणवत्ता सुधारने के प्रयासों का दावा करता रहा है। रैंकिंग में आई गिरावट ने इन्हीं दावों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा कर दिया है। औंधे मुंह गिरी रैंकिंग में सुधार के लिए अब नए अभियान या घोषणाओं से ज्यादा जरूरी मौजूदा व्यवस्थाओं की निगरानी और जवाबदेही तय करना है। अगले सर्वेक्षण में रैंकिंग सुधारना है तो आंकड़ों से आगे निकलकर जमीन पर बदलाव दिखाना होगा।
विज्ञापन

कोट-
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में गोरखपुर 22वें पायदान पर है। कोशिश रहेगी कि अगले सर्वेक्षण में शहर की रैंकिंग को और बेहतर किया जा सके।
-डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, मेयर, नगर निगम गोरखपुर

किन बिंदुओं पर गलती हुई जिसकी वजह से रैंकिंग में गिरावट आई है। इसकी समीक्षा की जाएगी। इसके बाद सुधारात्मक कार्य किए जाएंगे।
अजय जैन, नगर आयुक्त



17 पायदान की गिरावट को केवल संसाधनों की कमी का हवाला देकर उचित नहीं ठहराया जा सकता। असली समस्या व्यवस्था के क्रियान्वयन और उसकी मॉनिटरिंग में है। वायु गुणवत्ता सुधारने के उपायों पर लगातार और गंभीरता से काम करना होगा। मेरा मानना है कि सबसे ज्यादा फोकस धूल नियंत्रण पर होना चाहिए। दूसरी पाली की कमजोर सफाई, कचरा प्रबंधन की खामियां और नागरिक फीडबैक में कमी सीधे नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती हैं। चुनौतियां जरूर हो सकती हैं, लेकिन उनका प्रभावी प्रबंधन भी नगर निगम की ही जिम्मेदारी है। अब केवल सुधार के दावे नहीं, बल्कि सुधार के साथ स्पष्ट जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
- प्रो. विनय कुमार सिंह, पर्यावरण विज्ञान विभाग, गोरखपुर विश्वविद्यालय
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें