आरटीई के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को शहर के निजी स्कूलों में दाखिले का मौका मिलता है। इनकी फीस शासन की ओर से वहन की जाती है। वहीं कॉपी और किताब के लिए पांच हजार रुपये की धनराशि अभिभावकों के बैंक खाते में सीधे भेजी जाती है।
बीएसए बीएन सिंह ने बताया कि आरटीई के तहत दाखिला लेना सभी स्कूलों के लिए अनिवार्य है। ऐसे विद्यालयों को चिन्हित कर नोटिस जारी किया जाएगा। कोई भी स्कूल मनमानी नहीं कर सकता। अगर किसी विद्यालय ने आवंटित ब्रांच को बंद कर दिया है तो उन्हें दूसरी ब्रांच में प्रवेश लेना होगा। साथ ही इसकी सूचना विभाग को देनी होगी। यू डायस कोड बंद न होने की वजह से स्कूल का आवंटन हुआ है।
आरपीएम ग्रुप ऑफ स्कूल्स के डायरेक्टर अजय शाही ने बताया कि आरपीएम बक्शीपुर ब्रांच को मार्च में ही बंद कर दिया गया है। इसकी सूचना विभाग को दी गई है। स्कूल की दूसरी ब्रांचों में आरटीई के तहत प्रवेश लिया जा रहा है। जब से आरटीई लागू है, शत प्रतिशत बच्चों का प्रवेश लिया जाता है।
माउंट हेरा स्कूल के डायरेक्टर तंजील अहमद ने बताया कि आठवीं तक के विद्यालयों में छह महीने से ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। आगे स्कूल खुलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। वहीं स्कूल फीस जमा कराने से अभिभावकों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। इस परिस्थिति में प्रबंध समिति ने सत्र को शून्य करने का फैसला लिया है। ऐसे में बच्चों का प्रवेश कैसे लिया जाए?