फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रेलवे ई-टिकट के अंतरराष्ट्रीय गिरोह का मुख्य कैशियर मनोज महतो गिरफ्तार, पूरे देश में बेचता था रेडमिर्ची व एएनएमएस सॉफ्टवेयर

Thu, 10 Dec 2020 09:28 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बस्ती
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media
विज्ञापन

सॉफ्टवेयर और ऐप के जरिये फर्जी रेलवे ई-टिकट की अन्तर्राष्ट्रीय गैंग के रोकड़िया मनोज महतो को पुलिस टीम ने बृहस्पतिवार को धर दबोचा। इस गैंग के तीन गुर्गों को 2019 में इसी टीम ने गिरफ्तार किया था। मगर बिहार के सीतामढ़ी के मढ़िया सोनबरसा निवासी मनोज महतो बच निकला था। एसपी बस्ती ने उस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। 

विज्ञापन


एसपी हेमराज मीणा ने अपने कार्यालय में बृहस्पतिवार को प्रेसवार्ता करके पूरी जानकारी दी। खुलासा करते हुए एसपी ने बताया कि इस गिरोह का सरगना हामिद अशरफ पूरे भारत में अपने गुर्गों को ऐप और सॉफ्टवेयर बेचता था। इसके बदले मिलने वाले पैसों को विभिन्न फर्जी पोर्टल के माध्यम से नेपाल बॉर्डर से सटे सीतामढ़ी बिहार में उसके अकाउंट में भेजा जाता था। जांच में सामने आया कि फर्जी कागजातों से खुले पोर्टल खाते से करोड़ों की धनराशि को ब्लैक मनी से नगद कर हवाला के माध्यम से नेपाल में बैठे हामिद को भेज दिया जाता है। 2019 में हुई धरपकड़ के बाद रेलवे सुरक्षा बल की बढ़ती छापेमारी के कारण नवम्बर 2019 से भुगतान बिटकॉइन करेंसी में किया जाने लगा था। 2019 में करीब 15 करोड़ रुपये का लेखाजोखा मनोज के कब्जे से बरामद किया गया है। 

पैसे के लेनदेन और हामिद को उसका हिस्सा पहुंचाने वाला मनोज महतो है। जांच में इसका नाम सामने आने के बाद से ही पुलिस व रेलवे इसकी तलाश में थी। पुलिस के अनुसार करोड़ों की संपत्ति बना चुके मनोज ने अभी हाल ही में गाजियाबाद में एक फ्लैट खरीदा है। यहां गृहप्रवेश कर उसके बिहार लौटने की सूचना पर हर्रैया थाना पुलिस ने रेलवे की मदद से कप्तानगंज चौराहे के पास से बृहस्पतिवार को दबोच लिया।
विज्ञापन


पोर्टल पर 14 व बैंकों में खोल रखे थे 12 फर्जी खाते हैं। मनोज महतो ने आधार कार्ड, पेन कार्ड, मोबाइल नम्बर फर्जी दस्तावेज से बनाकर करीब 14 फर्जी खाते अलग-अलग पोर्टल पर बना रखे थे। इसके साथ ही एक दर्जन बैंक खाता भी खोल रखा था। ब्लैकमनी इन्हीं खातो में आती थी। पुलिस ने लेखाजोखा की डायरी बरामद की है। इसके अनुसार वर्ष 2019 में करीब 12 से 15 करोड़ रुपये को इसी तरीके से कैश कराया गया है। एमओएस/ मन्टीलिंक के एक ही फर्जी पोर्टल के खाता से करीब 6.68 करोड़ से अधिक की धनराशि को मनी ट्रांसफर किया गया है। 

ऑटो चलाया, सिलाई की
ई-टिकट गैंग का रोकड़िया बनने से पहले मनोज ऑटो रिक्शा चलाने के साथ कपड़े की सिलाई का काम करता था। 2017 में हामिद अशरफ के गैंग में सक्रिय हुआ और इसके बाद ब्लैकमनी को नगदी में बदलने का गोलमाल कर करोड़पति बन बैठा। मनोज ने नोयडा में 1.26 करोड़ रुपये की प्रापर्टी खरीदने का एग्रीमेंट किया था। इसके साथ ही गाजियाबाद में एक फ्लैट खरीदा था। इसके कागजात के साथ ही उसके कब्जे से पोस्ट ऑफिस के 09 बचत पपत्र व सहारा इंडिया के तीस सेविंग बांड 16 लाख रुपये के बरामद हुए हैं। 

इस टीम को शाबाशी
मनोज महतो को गिरफ्तार करने वाली टीम में निरीक्षक अपराध शाखा जितेन्द्र यादव, आरपीएफ निरीक्षक नरेन्द्र यादव, आरपीएफ निरीक्षक गोण्डा प्रवीण कुमार, थानाध्यक्ष हर्रैया सर्वेश राय, एसआई संजय यादव, हेड कांस्टेबल अनिल कुमार, आलोक कुमार आदि शामिल रहे।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें