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Chandrayaan 3: अंतरिक्ष युग के लिए मील का पत्थर साबित होगा चंद्रयान-3, जानिए विशेषज्ञों ने क्या कहा

Fri, 25 Aug 2023 02:46 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।

सार

गोविवि गणित एवं सांख्यिकी विभाग सहायक आचार्य डाॅ. राजेश कुमार ने कहा कि स्पेस यानी हमारा ब्रह्मांड आदि-प्राचीन काल से ही मानव जिज्ञासा के केंद्र में रहा है। सुदूर ग्रहों एवं उपग्रहों को जानने की कोशिश मानव सभ्यता हमेशा से करता आया है।
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चंद्रयान 3 - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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भारत ने बुधवार को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अपना रोबोटिक अंतरिक्ष यान चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग कराकर कीर्तिमान स्थापित कर दिया। चंद्रयान-3 की सफलता को लेकर पूरे देश में जश्न का माहौल है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरिक्ष युग के लिए यह मील का पत्थर साबित होगा। चंद्रमा पर छिपे अनेक रहस्यों का खुलासा होगा और भविष्य में शोधार्थियों के लिए मददगार होगा।

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गोविवि भौतिक विज्ञान विभाग के आचार्य प्रो. शांतनु रस्तोगी ने कहा कि चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव के पास चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर सफलता पूर्वक चंद्रमा की सतह पर उतरने और विक्रम के भीतर से प्रज्ञान रोवर चंद्रमा की सतह पर घूमने की संभावना से पूरा देश उल्लास से भर गया है। यह भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की कई उपलब्धियों में से प्रमुख है। चंद्रयान-3 न केवल भारत की एक तकनीकी उपलब्धि का प्रदर्शन कर रहा है, बल्कि इसके 6 उपकरण चंद्रमा के वैज्ञानिक अध्ययन के लिए उपयोगी होंगे। चंद्रमा के वैज्ञानिक अध्ययन को सेलनोलॉजी कहा जाता है। चंद्रमा तथा पृथ्वी की उत्पत्ति, इनके परस्पर संबंध, चंद्रमा में उपलब्ध खनिज, चंद्रमा पर जल की उपलब्धता एवं जीवन से संबंधित अनेक प्रश्नों के उत्तर दे सकेगा।

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गोविवि गणित एवं सांख्यिकी आचार्य प्रो. सुधीर कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि चंद्रयान-3 के अभियान की स्वर्णिम सफलता भारतवर्ष के युवा वर्ग में विज्ञान और प्रौद्योगिकी में रुचि के लिए नई प्रेरणा का संचार करेगा। चंद्रयान तीन की सफलता भारतवर्ष के आर्थिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने में विशेष सहयोग करेगी। देश में निर्मित पूर्णत: स्वदेशी मशीनरी का सफल होना हमें विश्व के समस्त देश के बीच ऊंचा स्थान प्रदान करेगा। हमारी स्पेस इंडस्ट्री में आया उछाल इसका प्रमाण है। इतनी कम लागत में इतने बड़े मिशन को सफलतापूर्वक पूर्ण करने से पूरे विश्व में हमारा अलग स्थान बना, जो हमारी इस इंडस्ट्री की ओर समस्त विकसित देशों को आकर्षित कर रहा है। यह अभियान की सफलता हमारे युवाओं को समाज की वैज्ञानिक प्रगति को उत्कर्ष बनाने के लिए प्रेरित करेगी।

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गोविवि भौतिक विभाग सहायक आचार्य डॉ. प्रभुनाथ प्रसाद ने कहा कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर का सफलतापूर्वक उतरना, प्रज्ञान रोवर का सतह पर घूमना, अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है। चंद्रयान-3 के चांद पर पहुंचने में न केवल भारत की तकनीकी उपलब्धि है, बल्कि वैज्ञानिक अध्ययन के लिए उपयोगी भी है। चांद तथा पृथ्वी की उम्र लगभग बराबर ही है, इसीलिए दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ में उपस्थित मॉलिक्यूल के अध्ययन से चंद्रमा व पृथ्वी की उत्पत्ति, इनके बीच पारस्परिक संबंध, चंद्रमा पर खनिज जल की उपलब्धता तथा जीवन की संभावना संबंधित जानकारी प्राप्त करना प्रज्ञान रोवर के चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने से बढ़ गई है। यह मिशन अंतरिक्ष युग के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

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गोविवि गणित एवं सांख्यिकी विभाग सहायक आचार्य डाॅ. राजेश कुमार ने कहा कि स्पेस यानी हमारा ब्रह्मांड आदि-प्राचीन काल से ही मानव जिज्ञासा के केंद्र में रहा है। सुदूर ग्रहों एवं उपग्रहों को जानने की कोशिश मानव सभ्यता हमेशा से करता आया है। हमारे ब्रह्मांड की दुनिया बहुत सारे रहस्यों से भरी हुई है। चंद्रयान मिशन इसी कड़ी में एक और कोशिश है। चंद्रयान मिशन से पृथ्वी-चंद्रमा प्रणाली एवं सौरमंडल जैसे सवालों के जवाब वैज्ञानिकों को मिल सकते हैं। चंद्रमा पर गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी की तुलना मे 1/6 गुना है। इसके वातावरण में विकिरण पृथ्वी से अधिक है। चंद्रमा पर अध्ययन तकनीकी नवाचारों और अनुप्रयोगों और नए संसाधनों के उपयोग के लिए नए व्यावसायिक मौके भी मुहैया कराएगी। चंद्रमा पर स्टेशन स्थापित करने से लोगों और खोजकर्ताओं को पृथ्वी से परे ग्रहों, उपग्रहों आदि के जानकारी में मदद मिलेगी।

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