क्षेत्र के रामपुर की रहने वाली पोल वॉल्ट की अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी संगीता चौधरी बताती हैं कि जब वह कक्षा आठवीं में पढ़ती थीं, तभी उनका संपर्क खेल शिक्षक चंद्रभूषण पांडेय से हुआ था। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ नहीं थी, लेकिन उनके अंदर खेलने का जुनून था। खेल शिक्षक चंद्रभूषण पांडेय ने उन्हें अभ्यास कराने के साथ सुविधाएं और जरूरत पर रकम भी दी। इसका नतीजा रहा कि वह पोल वॅाल्ट की अंतरराष्ट्रीय खेलों में कई स्वर्ण पदक जीत सकीं। इसके साथ ही खेल कोटे से सीआरपीएफ में नौकरी भी हासिल की।
धपोखरा की रहने वाली बीएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा और खिलाड़ी पिंकी चौहान बताती हैं कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है, लेकिन खेल में उनकी रुचि है। सेवानिवृत्त शिक्षक चंद्रभूषण पांडेय उन्हें अभ्यास कराते हैं और जरूरत के संसाधनों पर रकम भी खर्च करते हैं।
उनकी देखरेख में खेलते हुए कानपुर में ओपेन गेम में पिछले वर्ष तिकड़ी कूद में प्रदेश में उन्हें तीसरा स्थान मिला था। केवटली गांव निवासी पूनम बताती हैं कि हाई जंप में वह मंडलीय खेल में प्रतिभाग कर चुकी हैं। सेवानिवृत्त शिक्षक चंद्रभूषण पांडेय अभ्यास कराने के साथ संसाधन भी मुहैया कराने में पीछे नहीं हटते हैं।
सेवानिवृत्त शिक्षक चंद्रभूषण पांडेय बताते हैं कि उनका शुरू से ही खेल से लगाव है। उनका सोच है कि वह पैसे कमा कर कोई उतना नाम नहीं कर सकते, जितना किसी गरीब का भविष्य संवार कर सकते हैं। उन्होंने नौकरी में रहने के दौरान भी काम किया। उनके कई प्रतिभावान शिष्यों ने राज्यस्तरीय खेलों में और कुछ अंतरराष्ट्रीय खेलों में गोल्ड मेडल और सिल्वर मेडल जीतकर उनके हौसले को आगे बढ़ाया है।
वर्ष 2009-10 में सेवानिवृत्त हुए और तभी से प्रतिभाओं को खुद की जमीन में खेल का मैैदान बना कर अभ्यास कराते हैं। कूद, दौड़, डिस्कस, जेवलिंग आदि का अभ्यास कराते हैं। उन्हें प्रति महीने 35000 रुपये पेंशन मिलती है। दो बेटियां थीं, जिनकी उन्होंने शादी कर दी है।
इकलौता बेटा पवन पांडेय है। इसीलिए पेंशन की रकम से प्रति महीने खिलाड़ियों के लिए संसाधनों पर छह से सात हजार खर्च कर देते हैं। उनका ख्वाब है कि खेल की बदौलत प्रतिभाएं आगे निकलें और अपना भविष्य संवारें। इससे परिवार, समाज और राष्ट्र का नाम रोशन होगा।