पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी और लगा शिलापट्ट
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पूर्व मंत्री स्व. हरिशंकर तिवारी के नाम से लगे शिलापट्ट को हटाने से खड़ा हुआ विवाद बढ़ता ही जा रहा है। दोनों पक्षों से वार-पलटवार का सिलसिला जारी है। बुधवार को सपा के राष्ट्रीय सचिव व पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी ने आशंका जताई कि षडयंत्र के तहत नगर पंचायत बड़हलगंज के चेयरमैन प्रतिनिधि महेश उमर और चिल्लूपार के विधायक राजेश त्रिपाठी खुद पर हमला करवा सकते हैं।
उन्होंने सरकार से इन दोनों नेताओं की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। बुधवार को मीडिया के जरिये दिए गए इस बयान के बाद क्षेत्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। पूर्व मंत्री स्व. हरिशंकर तिवारी के शिलापट्ट को हटाने को लेकर फोन पर हुई तीखी नोकझोंक के बाद मामला और गरमा गया है।
विनय शंकर तिवारी ने आरोप लगाया कि चेयरमैन प्रतिनिधि महेश उमर ने बातचीत को एक साजिश के तहत रिकॉर्ड किया और उसे तोड़-मरोड़ कर वायरल किया गया। साथ ही शासन के दबाव में 48 घंटे बाद थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
उन्होंने आशंका जताई कि विधायक राजेश त्रिपाठी षडयंत्र के तहत चेयरमैन प्रतिनिधि या खुद पर हमला करवा सकते हैं। वर्ष 2007 से जब-जब चुनाव नजदीक आते हैं, तो उन्हें अपनी जान का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में उन्होंने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है।
सुरक्षा की मांग करके कटाक्ष के साथ सरकार को चैलेंज भी कर रहे
गोरखपुर। इस मामले में अपना नाम आने के बाद चिल्लूपार से भाजपा विधायक राजेश त्रिपाठी ने भी तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इस प्रकरण में विनय शंकर तिवारी सुरक्षा का हवाला दे रहे हैं। इससे साबित होता है कि उनके और प्रतिनिधि में सांठगांठ है।
उन्होंने तो धमकाने या विवाद करने को नहीं कहा था। इसलिए यह आरोप पूरी तरह झूठा है। वहीं, उनके द्वारा सुरक्षा व्यवस्था की मांग करना कटाक्ष के साथ सरकार को चैलेंज भी है कि कितनी भी सुरक्षा कर ली जाए, उन्हें जो करना है, करके रहेंगे। वैसे, पूर्व में वे लोग घटनाएं कर भी चुके हैं। उनका आरोप बहुत ही हल्का और सतही है।