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जनगणना में अड़चन: मकानों की लोकेशन नहीं मिल रही, कई लोग नहीं खोल रहे दरवाजा- प्रगणक परेशान

Mon, 25 May 2026 02:31 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर

सार

जनगणना विभाग की ओर से अलग-अलग क्षेत्रों में प्रगणकों को मकानों का लक्ष्य दिया गया है। किसी प्रगणक को 80 मकानों का डाटा भरना है तो किसी के जिम्मे 300 मकानों तक की जानकारी जुटाने की जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे में अधिक मकानों वाले क्षेत्रों में कार्य का दबाव भी बढ़ गया है।
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प्रगणक सरिता गुप्ता द्वारा शिवपुर शाहबाजगंज स्थित देवेंद्र कुमार के घर पर जनगणना करते हुए - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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शहर और ग्रामीण इलाकों में चल रहे मकानों के गणना कार्य के दौरान प्रगणकों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ी चुनौती मकानों की सही लोकेशन तलाशने और लोगों के सहयोग न मिलने की सामने आ रही है। कई स्थानों पर मकानों के नंबर स्पष्ट नहीं होने से प्रगणकों को घर-घर पहुंचने में काफी समय लग रहा है।

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वहीं, कुछ लोग घर का दरवाजा नहीं खोल रहे हैं, जिससे सर्वे कार्य प्रभावित हो रहा है। प्रगणकों का कहना है कि कॉलोनियों और नई बस्तियों में मकानों की पहचान करना चुनौती बन गया है। कई जगहों पर एक ही नाम की गलियां होने या मकानों पर नंबर न लिखे होने से लोकेशन ढूंढने में अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है।

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इसके अलावा, कुछ परिवार दिन में घर पर नहीं मिल रहे, जिससे उन्हें बार-बार चक्कर लगाना पड़ रहा है। जनगणना विभाग की ओर से अलग-अलग क्षेत्रों में प्रगणकों को मकानों का लक्ष्य दिया गया है। किसी प्रगणक को 80 मकानों का डाटा भरना है तो किसी के जिम्मे 300 मकानों तक की जानकारी जुटाने की जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे में अधिक मकानों वाले क्षेत्रों में कार्य का दबाव भी बढ़ गया है।

रविवार को जंगल सालिकराम की मानस विहार कॉलोनी में प्रगणक जयप्रकाश यादव ने प्रभाकर उपाध्याय के घर पहुंचकर परिवार की जानकारी दर्ज की। वहीं, शिवपुर शाहबाजगंज क्षेत्र में प्रगणक सरिता गुप्ता ने देवेंद्र कुमार के घर पर जनगणना संबंधी विवरण एकत्र किया। लोकेशन खोजने में उन्हें दिक्कत हुई तो स्थानीय पार्षद ने उनकी मदद की।
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