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Gorakhpur News: सीसीटीवी कैमरे ने बढ़ाई मरीज माफिया की धड़कन......खोजने लगे तोड़

Wed, 04 Sep 2024 12:48 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर

सार

कोलकाता की घटना के बाद सरकार ने मेडिकल कॉलेज समेत सभी सरकारी और निजी अस्पतालों के अलावा शहर के संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाने के निर्देश दिए हैं। यह कदम वैसे तो सुरक्षा के लिहाज से उठाया गया है, लेकिन इसका सबसे बड़ा प्रभाव अस्पतालों में घुसकर इलाज के नाम पर दलाली करने वालों पर पड़ेगा। इससे धंधेबाजों की बेचैनी बढ़ी हुई है।
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जिला अस्पताल में लगी मरीजों की भीड़ - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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अस्पतालों में सभी जगह सीसीटीवी कैमरा लगाने की प्रशासन की पहल ने माफिया की धड़कन बढ़ा दी है। उन्हें खुद के पहचाने जाने का डर सता रहा है। इसलिए अभी से वे सीसीटीवी कैमरे की तोड़ भी खोजने लगे हैं। दवा से लेकर खून तक बेचने वाले ये माफिया अब अस्पताल के बाहर नया अड्डा तलाश रहे हैं, जहां से बैठे-बैठे धंधे को संचालित किया जा सके।
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कोलकाता की घटना के बाद सरकार ने मेडिकल कॉलेज समेत सभी सरकारी और निजी अस्पतालों के अलावा शहर के संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाने के निर्देश दिए हैं। यह कदम वैसे तो सुरक्षा के लिहाज से उठाया गया है, लेकिन इसका सबसे बड़ा प्रभाव अस्पतालों में घुसकर इलाज के नाम पर दलाली करने वालों पर पड़ेगा।

इससे धंधेबाजों की बेचैनी बढ़ी हुई है। मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल के भीतर से अपना धंधा चलाने वाले अब बाहर नई जगह तलाश कर रहे हैं। दिनभर इमरजेंसी वार्ड के बाहर टहलने वालों ने मेडिकल कॉलेज की बाउंड्रीवॉल के किनारे की दुकानों पर बैठकी जमानी भी शुरू कर दी है।
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धंधे में सहायक बनेंगी निजी एंबुलेंस
कुशीनगर जिले के हाटा का रहने वाला 24 वर्षीय युवक अपना एंबुलेंस चलाता है। मंगलवार को बीआरडी मेडिकल कॉलेज गेट के पास चाय की दुकान पर मिले इस युवक ने बताया कि करीब छह महीने से मेडिकल कॉलेज के भीतर प्राइवेट एंबुलेंस का जाना बंद है।

तब से हम लोग गेट के बाहर ही अपनी गाड़ी खड़ी करते हैं। अंदर से दुकान पर आए मरीज के तीमारदार से बात होती है और वे मरीज को बाहर लेकर आते हैं। यहां से हम लोग बैठाकर ले जाते हैं। दिन में एक मरीज छोड़ने का 500 रुपये और रात में 1000 रुपये लेते हैं।

अगर मरीज अंदर से खुद आने की स्थिति में नहीं होता है तो उसे स्ट्रेचर पर कर्मचारी वार्ड से बाहर लेकर आते हैं। वहां से निजी गाड़ी से बाहर लाया जाता है। सीसीटीवी कैमरा लगने के सवाल पर इसका कहना था कि इससे मुश्किल तो बढ़ेगी, लेकिन धंधा नहीं रुकेगा। थोड़ा कुरेदने पर इस चालक ने बताया कि सुपर स्पेशयलिटी की तरफ से हर दिन निजी गाड़ियां जाती हैं और मरीज को बाहर लेकर आती हैं। वहां से जिसे जहां जाना होता है, वहां पहुंचा देते हैं।

अस्पताल कर्मियों की बढ़ गई पूछ
जिला अस्पताल से मरीजों को बाहर निकालने में सबसे बड़ा हाथ संविदाकर्मियों का रहता है। सफाई और सेवा से जुड़े इन कर्मचारियों को मरीज बाहर निकलने के एवज में निजी अस्पताल संचालक रुपये मुहैया कराते हैं। आर्थो वार्ड से होते हुए सीटी स्कैन वाली बिल्डिंग के बगल से मरीज निकाल लिए जाते हैं।

इस गेट पर सीसीटीवी कैमरा लगा भी देंगे तो प्राइवेट वार्ड के बगल से संकरी गली है, जो महिला अस्पताल के सामने निकलती है। इस कार्य में शामिल कर्मियों की पूछ बढ़ गई है, क्योंकि अब इनकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाएगी। सरकारी अस्पतालों से मरीजों को बरगलाकर निजी अस्पताल ले जाने और इलाज के बहाने उनसे लाखों रुपये वसूल लेने वाले माफियाओं का खेल लंबे समय से जारी है।

इनका नेटवर्क इतना मजबूत हो चुका है कि गंभीर से गंभीर मरीज को बिना सुविधा या बिना डिग्री वाले डॉक्टर के पास भर्ती करा देते हैं और रुपये ऐंठकर गायब हो जाते हैं। बाद में जब इलाज के अभाव में मरीज की मौत होती है, तब हंगामा मचता है। पिछले साल बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इसी तरह से खून माफिया ने भी अपना नेटवर्क फैला रखा था।

वे गांव से मजदूरी करने आए लोगों को बहला फुसलाकर ब्लड बैंक ले जाते थे और वहां मरीज का रिश्तेदार बताकर खून बेच देते थे। खून देने वाला तो पांच सौ-हजार रुपये पाता था और माफिया आठ से 10 हजार रुपये।
दवा की पर्ची तो आएगी ही

पिछले सप्ताह बीआरडी मेडिकल कॉलेज में दवा को खास दुकान से खरीदने का सुझाव दे रही डॉक्टर का वीडियो वायरल हो गया था। जिला अस्पताल में ऐसी कहानियां रोज ही होती हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के पास दवा के एक दुकानदार कहते हैं कि सरकार की इतनी सख्ती के बावजूद हर जगह सरकारी अस्पताल के बाहर दवा बिकती ही है। आगे भी बिकेगी। हां, यह जरूर होगा कि कैमरे के सामने पर्ची पकड़ते वक्त पकड़े जाने का डर रहेगा, लेकिन अस्पताल में तमाम ऐसी जगहें हैं, जहां से पर्चा भी निकल जाता है और दवा भी पहुंच जाती है। हम लोग तो वार्ड में बेड तक दवा पहुंचा देते हैं। कभी मरीज का तीमारदार लेकर जाता है, कभी हमारा आदमी ही तीमारदार बन जाता है।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ राजकुमार जायसवाल ने बताया कि सीसीटीवी कैमरे लगने से हर तरह की मनमानी रुकेगी। डॉक्टरों की सुरक्षा बढ़ेगी। मरीज-माफिया कैमरे के रिकार्डिंग में आ जाएंगे। जिससे पर उन पर कार्रवाई में आसानी होगी।

एसएसपी गौरव ग्रोवर ने बताया कि बीआरडी और जिला अस्पताल प्रशासन से पुलिस समन्वय बनाकर काम करेगी। अस्पताल प्रबंधन से कहा गया है कि वे ब्लैक स्पॉट चिह्नित कर कैमरे लगवाएं, ताकि निगरानी में सुविधा हो। इसके साथ ही हर जगह पुलिस की गश्त बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया है। अगर कोई व्यक्ति बार-बार बिना उद्देश्य घूमता मिलेगा तो उसे चिह्नित कर कार्रवाई होगी।
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