बोर्ड ने प्राचार्य को लिखे पत्र में बताया है कि अगर एक बार बच्चे को असफल होने का अहसास हो जाता है तो बच्चों को उसमें से निकालना बहुत कठिन होता है। वो डिप्रेशन में चले जाते हैं। उन्हें लगता है कि अब वो आगे भविष्य में कुछ नहीं कर पायेंगे। ऐसे में बच्चों को उत्साह देने की जरूरत है।
स्कूल स्तर पर होने वाली वार्षिक परीक्षा रिजल्ट में भी होगा लागू
बोर्ड की मानें तो बोर्ड रिजल्ट के अलावा इसे स्कूल की वार्षिक परीक्षा में भी लागू किया जायेगा। स्कूल स्तर पर भी अंक पत्र या रिपोर्ट कार्ड में फेल शब्द को हटाने की तैयारी है। लेकिन यह पहले बोर्ड रिजल्ट में लागू किया जायेगा।
ग्रेडिंग के बदले अब अंकों में दिये जाते हैं रिजल्ट
बोर्ड की मानें तो 2009 में बोर्ड का रिजल्ट ग्रेडिंग में देना शुरू किया गया था लेकिन इसमें 2018 में बदलाव कर दिया गया। 2018 का रिजल्ट अंकों में दिया जाने लगा। ग्रेडिंग सिस्टम में फेल-पास नहीं लिखा रहता था। केवल ए से लेकर ई तक की ग्रेडिंग दी जाती थी।
बोर्ड की मानें तो कंपार्टमेंटल की जगह वहां पर सप्लीमेंट्री परीक्षा जैसे शब्द लिखे जा सकते हैं। इसके अलावा सेकेंड एग्जाम या विशेष परीक्षा का भी नाम कंपार्टमेंटल परीक्षा को दिया जा सकता है। इसके अलावा फेल शब्द की जगह नॉट-क्वालीफाई (अयोग्य) जैसे शब्द दिये जा सकते हैं। जिन शब्द पर प्राचार्यों की सलाह अधिक आयेगी, उसे लागू किया जाएगा। सभी प्राचार्य को चार शब्द भेजने है।
कुछ शब्द ऐसे होते हैं जो केवल निगेटिव होने का अहसास दिलाते हैं। खासकर बच्चों पर उसका असर काफी होता है। इसलिए यह बदलाव जरूरी था। वर्ष 2020 के बोर्ड के अंक पत्र में इसे हटाया गया है। अब फेल की जगह एसेंशियल रिपीट लिखा जाएगा।
-अजीत दीक्षित, जिला समन्वयक, सीबीएसई