गुस्सा आना सामान्य बात है। लेकिन जब यह नियंत्रण से बाहर हो जाता है तो विनाशकारी हो जाता है। अनियंत्रित गुस्से की वजह से सामाजिक, व्यक्तिगत और भावनात्मक रूप से विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को कई नुकसान उठाने पड़ते हैं। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने इसका संज्ञान लेकर अब स्कूलों को क्रोध मुक्त जोन (एंगर फ्री जोन) बनाने का फैसला किया है।
सीबीएसई के मुताबिक शिक्षक, बच्चों को गलती पर उन्हें डांटने के बजाय मुस्कुराकर और शांति से समस्या को दूर करेंगे। अपने गुस्से पर काबू रखने के लिए शिक्षकों को श्वांस संबंधी व्यायाम सिखाया जाएगा, इससे उनका दिमाग भी स्वस्थ रहेगा। इसका आदेश शहर के सीबीएसई से संचालित 103 स्कूलों में पहुंच गया है।
बोर्ड का मानना है कि इससे विद्यार्थियों को मानसिक तौर पर सक्रिय और स्वस्थ रहने में मदद मिलेगी। इससे वे खुश होकर घर जा सकेंगे और अगले दिन तनाव मुक्त होकर स्कूल वापस आना चाहेंगे। स्कूल के प्रशासक, शिक्षक, कर्मचारी और अभिभावक अपने गुस्से पर काबू रखने की कोशिश करेंगे। वही, बच्चों को फ्रीडम फ्रॉम एंगर (गुस्से से आजादी) की अहमियत समझाएंगे।
बोर्ड ने स्कूलों को एंगर फ्री जोन बनाने का निर्णय लिया है। इसका मकसद बच्चों के अंदर से भय को दूर भगाना है ताकि वे पढ़ाई को बोझ समझने की बजाय उसका आनंद ले सकें। आदेश मिला है इसे लागू किया जाएगा।
-विशाल त्रिपाठी, प्रधानाचार्य, आर्मी पब्लिक स्कूल