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पीएनबी घोटाला: बिना कागजात के खोल दिए 15 डमी अकाउंट...फिर पार कर दिए रुपये, ED-CBI ने लगाई ये रोक

Sat, 29 Mar 2025 03:20 PM IST
रोहित सिंह अमर उजाला ब्यूरो

सार

सीबीआई की तरफ से दाखिल रिपोर्ट के अनुसार, घोटाले में तत्कालीन शाखा प्रबंधक श्यामानंद चौबे को मुख्य आरोपी और लोन इंचार्ज प्रदीप कुमार जायसवाल व ओम प्रकाश मल्ल, हेड कैशियर राजेंद्र कुमार, चपरासी अरविंद समेत 52 को आरोपी बनाया गया है। इन आरोपियों ने पांच जुलाई 2011 से 11 जुलाई 2015 के बीच ब्रांच में 15 डमी अकाउंट खोलकर सरकारी धन का गबन किया।
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सीबीआई और ईडी। (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : ANI
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विस्तार
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विकास भवन स्थित पंजाब नेशनल बैंक की शाखा में सरकारी योजनाओं के जरिये 6.51 करोड़ के गबन के मामले में चौंकाने वाले कारनामे उजागर हुए हैं। सीबीआई की जांच में पता चला कि बिना कागजात के 15 डमी अकाउंट खोलकर पांच साल लूट होती रही। मामला खुलने पर सीबीआई ने जांच की तो खातों के भौतिक सत्यापन के कोई साक्ष्य ही नहीं मिले। इन्हीं खातों में सरकारी योजनाओं की रकम भेजकर निकाली गई।

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सीबीआई की तरफ से दाखिल रिपोर्ट के अनुसार, घोटाले में तत्कालीन शाखा प्रबंधक श्यामानंद चौबे को मुख्य आरोपी और लोन इंचार्ज प्रदीप कुमार जायसवाल व ओम प्रकाश मल्ल, हेड कैशियर राजेंद्र कुमार, चपरासी अरविंद समेत 52 को आरोपी बनाया गया है।

इन आरोपियों ने पांच जुलाई 2011 से 11 जुलाई 2015 के बीच ब्रांच में 15 डमी अकाउंट खोलकर सरकारी धन का गबन किया। जो खाते ब्रांच में खोले गए, उससे संबंधित कोई डॉक्यूमेंट भी नहीं लिया गया और न ही खातेदारों का कोई सत्यापन कराया गया।
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उधर, पीएनबी विकास भवन शाखा में शुक्रवार को दिनभर मामले की चर्चा होती रही। हालांकि उस समय का कोई कर्मचारी यहां तैनात नहीं है। बैंककर्मियों का कहना है कि पहले काफी काम मैनुअल होता था। इसलिए खातों में गड़बड़ी आसान थी।

अब सब कुछ ऑनलाइन होने के बाद ऐसा कर पाना संभव नहीं है। पीएनबी विकास भवन शाखा प्रबंधक एनसी तिवारी ने बताया कि इस मामले की जानकारी हमें नहीं है।
सरकारी योजना के धन को ऋण के तौर पर बांट दिया

सीबीआई की जांच रिपोर्ट के अनुससार, मेसर्स शुक्ला इंडस्ट्रीज के प्रोपराइटर सभाजीत शुक्ला ने तत्कालीन शाखा प्रबंधक से मिलकर अपने खाते में 95.80 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। इसी तरह मेसर्स वंदना इंटरप्राइजेज की प्रोपराइटर वंदना तिवारी ने व्यावसायिक गतिविधियों के लिए ऋण मांगा और उनके फर्म के खाते में 58.46 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए गए।

आरोपियों की वाराणसी, फतेहपुर, कानपुर देहात की संपत्तियों की बिक्री पर भी रोक
पीएनबी (पंजाब नेशनल बैंक) विकास भवन शाखा में सरकारी योजनाओं के धन का गबन करने के आरोपी ब्रांच मैनेजर और उसकी पत्नी की वाराणसी की संपत्ति की बिक्री पर भी ईडी ने रोक ली दी है। वहीं फर्जी लोन लेने के आरोपी उमेश यादव और उसकी पत्नी की कानपुर देहात और उसके भाई की पत्नी की फतेहपुर की संपत्ति की बिक्री, बंटवारे या किसी भी अन्य गतिविधि पर भी रोक लगा दी गई है।

बृहस्पतिवार को गोरखपुर आई सीबीआई और ईडी की टीम ने मामले से जुड़े खोराबार क्षेत्र के महादेव झारखंडी इलाके में संतोष तिवारी की पत्नी वंदना तिवारी के हाउस नंबर 61 सी और सभाजीत शुक्ल के खजनी तहसील के उनवल स्थित मौजा साहुलखोर में आराजी नंबर 203 स्थित जमीन की बिक्री पर रोक लगाई थी।

इसके अलावा आरोपी शाखा प्रबंधक श्यामनंदन चौबे और पत्नी आशा चौबे की वाराणसी के महमूरगंज मोहल्ले की शिवाजी नगर कॉलोनी स्थित आवासीय मकान की बिक्री पर भी रोक लगाई गई है।

उमेश चंद्र यादव और पत्नी मंजू देवी के नाम से कानपुर देहात जिले के गांव उमरान तहसील अकबरपुर स्थित जमीन खरीदी है। हीरावती देवी पत्नी दिनेश की गांव मदरांव तहसील बिंदकी जिला फतेहपुर में जमीन है। इन जमीनों की भी बिक्री पर रोक लगाई गई है। इस पर कार्रवाई के लिए सब रजिस्ट्रार सदर वाराणसी, सब रजिस्ट्रार बिंदकी फतेहपुर और सब रजिस्ट्रार अकबरपुर जिला कानपुर देहात को भी पत्र भेज दिया गया है।

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