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रिश्तों का तनाव: भावनाओं के उफान में जिंदगी से कर रहे किनारा, बाद में हो रहा पछतावा- महिलाएं 70 फीसदी

Tue, 16 Jun 2026 02:32 PM IST
Rohit Singh निखिल तिवारी, गोरखपुर

सार

जिले में वर्ष 2025 में खुदकुशी के 149 मामले सामने आए थे। इस वर्ष जनवरी से जून में अब तक 100 से ज्यादा मामले ऐसे आए, जिसमें लोगों ने खुदकुशी करने की कोशिश की। इनमें 70 फीसदी महिलाएं हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अधिकतर मामलों में यह पूर्व नियोजित नहीं बल्कि आवेगपूर्ण निर्णय होता है। 
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गोरखपुर बीआरडी मेडिकल कॉलेज - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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 गुस्सा, तनाव, रिश्तों में खटास और भावनात्मक आवेग लोगों को ऐसा कदम उठाने के लिए मजबूर कर रहा है, जिसका पछतावा बाद में होता है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में रोजाना एक-दो ऐसे मामले पहुंच रहे हैं, जिनमें लोगों ने आवेग में आकर खुदकुशी की कोशिश की होती है।

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जिले में वर्ष 2025 में खुदकुशी के 149 मामले सामने आए थे। इस वर्ष जनवरी से जून में अब तक 100 से ज्यादा मामले ऐसे आए, जिसमें लोगों ने खुदकुशी करने की कोशिश की। इनमें 70 फीसदी महिलाएं हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अधिकतर मामलों में यह पूर्व नियोजित नहीं बल्कि आवेगपूर्ण निर्णय होता है।

ऐसे लोग अक्सर मदद और सहारे की उम्मीद करते हैं लेकिन समय पर सहयोग नहीं मिलने पर आत्मघाती कदम उठा लेते हैं। इसके विपरीत जो लोग लंबे समय तक योजना बनाकर खुदकुशी का फैसला करते हैं, उन्हें बचाना अपेक्षाकृत अधिक मुश्किल होता है।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग की ओपीडी में खुदकुशी की कोशिश के दो तरह के मामले सबसे अधिक सामने आ रहे हैं। इसके मुख्य दो कारण सामने आ रहे हैं। पहला प्रेम संबंधों में तनाव या ब्रेकअप/झगड़े के बाद भावनात्मक दबाव का बढ़ जाना है, जिससे वे आत्मघाती कदम तक पहुंच जाती हैं।दूसरा कारण नई शादी के बाद ससुराल में सामंजस्य न बन पाने से उत्पन्न तनाव है।

ज्यादातर मामलों में नस काटने, फंदे से लटकने या जहर खाने जैसी कोशिशें सामने आती हैं। ऐसे मरीजों को पहले उनकी शारीरिक स्थिति के अनुसार संबंधित विभाग में भर्ती किया जाता है। हालत स्थिर होने के बाद उन्हें मनोरोग विभाग भेजा जाता है, जहां काउंसिलिंग और मानसिक उपचार किया जाता है। विभाग के डॉ. तापस आइच के मुताबिक, पिछले छह माह में ऐसे 100 से अधिक मरीजों का इलाज और काउंसिलिंग की जा चुकी है।

केस 1
19 वर्षीय एक युवती का पिछले कुछ समय से एक लड़के से प्रेम संबंध था। कुछ दिन बाद दोनों में विवाद होने लगा। युवती ने नस काटने की कोशिश की। उसे इलाज के लिए भर्ती किया गया। नियमित इलाज से उसकी स्थिति में सुधार हुआ।

केस 2
गोला इलाके की एक महिला घर में प्रताड़ना से तंग आ गई थी। आए दिन घर में विवाद से वह परेशान थी। दो माह पहले उसने झगड़े के बाद जहर खा लिया। समय से परिजन अस्पताल ले गए और उसकी जान बचाई जा सकी। बाद में मनोरोग विभाग में उसका सफल इलाज किया गया।

ऐसे पहचानें लक्षण
-
बार-बार निराशा या मरने की बातें करना
- अचानक लोगों से दूरी बनाना

- व्यवहार और मूड में बड़ा बदलाव
- अपनी चीजें बांटना या अधूरे काम निपटाना
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- खतरनाक या आत्मघाती तरीकों की जानकारी जुटाना
- परिवार के सदस्य को दें भावनात्मक सहारा

डॉ. तापस ने बताया कि आवेग या तनाव की स्थिति में कोई भी बड़ा फैसला न लें। अपनी बात परिवार, मित्र या विशेषज्ञ से जरूर साझा करें। पर्याप्त नींद, नियमित दिनचर्या और सामाजिक जुड़ाव मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं। यदि परिवार के किसी सदस्य में उदासी, चिड़चिड़ापन, अकेलापन या निराशा के संकेत दिखें तो उसकी बात ध्यान से सुनें और उसे भावनात्मक सहारा दें।

डांटने, दोष देने या उसकी भावनाओं को नजरअंदाज करने से बचें। जरूरत पड़ने पर तुरंत मनोचिकित्सक या काउंसलर की मदद लें और ऐसे व्यक्ति को लंबे समय तक अकेला न छोड़ें।
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