ऐसे लोग अक्सर मदद और सहारे की उम्मीद करते हैं लेकिन समय पर सहयोग नहीं मिलने पर आत्मघाती कदम उठा लेते हैं। इसके विपरीत जो लोग लंबे समय तक योजना बनाकर खुदकुशी का फैसला करते हैं, उन्हें बचाना अपेक्षाकृत अधिक मुश्किल होता है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग की ओपीडी में खुदकुशी की कोशिश के दो तरह के मामले सबसे अधिक सामने आ रहे हैं। इसके मुख्य दो कारण सामने आ रहे हैं। पहला प्रेम संबंधों में तनाव या ब्रेकअप/झगड़े के बाद भावनात्मक दबाव का बढ़ जाना है, जिससे वे आत्मघाती कदम तक पहुंच जाती हैं।दूसरा कारण नई शादी के बाद ससुराल में सामंजस्य न बन पाने से उत्पन्न तनाव है।
ज्यादातर मामलों में नस काटने, फंदे से लटकने या जहर खाने जैसी कोशिशें सामने आती हैं। ऐसे मरीजों को पहले उनकी शारीरिक स्थिति के अनुसार संबंधित विभाग में भर्ती किया जाता है। हालत स्थिर होने के बाद उन्हें मनोरोग विभाग भेजा जाता है, जहां काउंसिलिंग और मानसिक उपचार किया जाता है। विभाग के डॉ. तापस आइच के मुताबिक, पिछले छह माह में ऐसे 100 से अधिक मरीजों का इलाज और काउंसिलिंग की जा चुकी है।