- गीडा थाना क्षेत्र के जीरो पॉइट छपिया का मामला, खजनी पुलिस दो घंटे तक सीमा तय करती रही
- ससुराल जा रहे परिवार को बदमाशों ने चलती बाइक पर बनाया निशाना
गीडा। गीडा थाना क्षेत्र में लिंक एक्सप्रेसवे के जीरो पॉइंट छपिया के पास बृहस्पतिवार को बाइक सवार बदमाशों ने दिनदहाड़े महिला के गले पर झपट्टा मारकर मंगलसूत्र और सोने की चेन छीन ली। इससे पहले कि महिला कुछ समझ पाती बाइक सवार बदमाश भाग निकले। सूचना पर खजनी पुलिस पहुंची लेकिन कार्रवाई और बाइक सवारों की तलाश के बजाय करीब दो घंटे तक सीमा विवाद में उलझी रही। बाद में मामला गीडा थाना क्षेत्र का निकला।
जानकारी के अनुसार, बेलीपार थाना क्षेत्र के बड़ेरिया निवासी सुनील मौर्या अपनी पत्नी शीला मौर्या और दो छोटे बच्चों के साथ बाइक से सहजनवां थाना क्षेत्र के बनहोइया गांव स्थित ससुराल जा रहे थे। वह बाघागाड़ा से फोरलेन पर चढ़कर लिंक एक्सप्रेसवे के जीरो पॉइंट छपिया के पास पहुंचे ही थे कि पीछे से पल्सर बाइक पर सवार दो अज्ञात बदमाश आए और झपट्टा मारकर शीला के गले से मंगलसूत्र और सोने की दो चेन छीनकर भाग निकले।
इस वारदात के बाद पीड़ित सुनील मौर्या ने तत्काल खजनी थाने की पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची लेकिन थानाक्षेत्र की सीमा को लेकर उलझ गई। सीओ गीडा योगेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि बदमाशों की तलाश में तेनुआ टोल प्लाजा पर लगे सीसीटीवी कैमरों को भी खंगाला गया है। मामले की जांच जारी है, जल्द ही आरोपियों की पहचान कर उन्हें पकड़ लिया जाएगा।
00
सीमा विवाद में उलझी रही पुलिस, बदमाशों की नहीं की धरपकड़
वारदात खजनी और गीडा थाना क्षेत्र की सीमा के पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के समीप छपिया स्थित सोनवान नाले के पास हुई थी। वारदात के बाद पुलिस करीब दो घंटे तक क्षेत्राधिकार को लेकर उलझी रही। पीड़ित दंपती का कहना है कि उन्होंने मामले की जानकारी तत्काल पुलिस को दे दी थी। मौके पर पहुंची खजनी पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया लेकिन यह कहते हुए जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया कि वारदात गीडा थाना क्षेत्र में हुई है। बदमाशों की धरपकड़ के लिए कोशिश भी नहीं की। इसके बाद दंपती अपने दोनों बच्चों संग गीडा थाने पहुंचे जहां पूछताछ के बाद बिना तहरीर लिए उन्हें यह कहकर लौटा दिया गया कि जानकारी मिलने पर सूचित किया जाएगा। स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यदि सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय होकर इलाके की घेराबंदी करती तो बदमाशों को पकड़ा जा सकता था। पुलिस अपराधियों को पकड़ने के बजाय सीमा तय करने में उलझी रही।