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Gorakhpur News: हॉस्पिटल संचालक ने दी तहरीर, सीसीटीवी फुटेज और कॉल रिकॉर्ड खंगाल रही पुलिस

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न्यू राजेश हाईटेक हॉस्पिटल संचालक से फर्जी ओएसडी और सीएमओ बनकर 18 लाख वसूलने का मामला
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तीन चरणों में कॉल कर संचालक को दिया भरोसा, चौथे चरण में सीएमओ दफ्तर के पास लिया कैश
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। सिकरीगंज के न्यू राजेश हाईटेक हॉस्पिटल संचालक से सीएम का फर्जी ओएसडी और सीएमओ बताकर 18 लाख रुपये की जालसाजी के मामले में आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की गई है। संचालक की शिकायत के बाद अब पुलिस रुपये लेने वाले व्यक्ति और कॉल करने वाले नंबरों की जानकारी सीसीटीवी फुटेज और कॉल रिकॉर्ड के जरिये जांच रही है।
बताया जा रहा है कि कॉल लखीमपुर खीरी के पते वाले मोबाइल नंबर से की गई थी, जबकि कॉल वास्तव में मुंबई से की जा रही थी। इसके साथ ही पुलिस ने सीएमओ से भी जानकारी मांगी है। अब तक की जांच में पुलिस ने यह भी पता लगाया है कि जिस व्यक्ति ने कैश लिया, वह स्थानीय स्तर पर सटीक लोकेशन और सीएमओ कार्यालय के आसपास की जानकारी रखता था। इससे यह साफ होता है कि यह कोई साधारण ठगी नहीं बल्कि सुनियोजित अपराध था।
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खुद को सीएम का फर्जी ओएसडी और सीएमओ डॉ. राजेश झा के नाम पर अस्पताल संचालक राजेश राय से वसूली में ठगों ने साइबर अपराधियों जैसे तौर-तरीके अपनाए मगर अंतर केवल इतना था कि पैसे खाते में ट्रांसफर न कराकर सीधे कैश में लिए गए। इससे जालसाजों ने अस्पताल संचालक का विश्वास जीतकर भारी रकम ऐंठ ली। अभी तक कुल कितने लोगों से वसूली हुई है, इसका आंकड़ा सामने नहीं आया है। मामले में विवेचक ने प्राथमिकी दर्ज कराने वाले सीएमओ से इसकी जानकारी मांगी है।

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फोन करने वाला एक ही था या अलग-अलग, शुरू हुई जांच
दरअसल, सिकरीगंज के न्यू राजेश हाईटेक अस्पताल में हाल ही में मोतियाबिंद सर्जरी कैंप आयोजित किया गया था। 30 मरीजों की सर्जरी के बाद कई मरीजों की आंखों में संक्रमण हो गया और 10 की आंख निकालनी पड़ी। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल पर अस्थायी रोक लगा दी। जांच रिपोर्ट में संक्रमण और लापरवाही मिलने के बाद लाइसेंस निरस्त कर दिया गया। पुलिस की जांच के मुताबिक, कार्रवाई से बचने की कोशिश में अस्पताल संचालक कई लोगों से संपर्क कर रहे थे। इसी दौरान जालसाजों ने अस्पताल संचालक को अपने जाल में फंसाया और सेटलमेंट के नाम पर पैसे वसूले। जब सीएमओ को पता चला कि उनके नाम का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है, तब उन्होंने कैंट थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई। हालांकि, उनके केस में किसी भी प्रकार से पैसे देने की बात का उल्लेख नहीं है। पुलिस अब इस मामले में यह पता लगा रही है कि फोन पर आए अलग-अलग नंबरों के पीछे एक ही व्यक्ति था या कई लोग शामिल थे। साथ ही यह जांच की जा रही है कि जिस नंबर से कॉल की गई, उसका लोकेशन क्या था?
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तीन चरणों में फोन कॉल और संदेश आया, चौथी बार कैश वसूले
पुलिस की जांच में पता चला कि ठगों ने तीन चरणों में फोन कॉल और संदेश भेजकर भरोसा बनाया और दबाव डाला। चौथे चरण में स्थानीय सहयोगी को भेजकर अस्पताल संचालक से सीएमओ कार्यालय के पास ही 18 लाख रुपये कैश में वसूल करवाए गए। पहले चरण में अस्पताल संचालक को शासन के अधिकारियों से संपर्क कराए जाने का भरोसा दिलाया गया। दूसरे और तीसरे चरण में लगातार कॉल और व्हाट्सएप मैसेज भेजे गए। आखिरी कॉल 8419022640 नंबर से आई, जिसमें कॉलर ने खुद को सीएमओ का सहायक बताया और 18 लाख रुपये की मांग की।
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