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गोरखपुरः चिड़ियाघर में हाईटेंशन लाइन के टेंडर में हुआ खेल, सीएम कर सकते हैं ‘फेल’

Sat, 25 Jan 2020 01:38 PM IST
विजय जैन डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
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Gorakhpur Zoo - फोटो : अमर उजाला
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चिड़ियाघर में हाईटेंशन लाइन निर्माण के टेंडर में गड़बड़ी का मामला अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मुख्य अभियंता दफ्तर से डिस्काम के प्रबंध निदेशक कार्यालय तक पहुंच गया है। जल्द ही मामला सीएम के पोर्टल और इलाहाबाद हाईकोर्ट भी पहुंच सकता है।
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दरअसल, अधीक्षण अभियंता शहरी यूसी वर्मा ने जरूरी दस्तावेज के अभाव में जिस फर्म का टेंडर खोलने से मना किया था, उसे मुख्य अभियंता देवेंद्र सिंह ने खुलवा दिया है। इससे नाराज दूसरी फर्मों ने मोर्चा खोल दिया है।

चिड़ियाघर निर्माण करने वाली कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम ने अगस्त 2019 में बिजली निगम को पत्र लिखकर चिड़ियाघर में अलग फीडर बनाने की मांग की थी। निगम ने सर्किट हाउस उपकेंद्र से लगभग दो किमी दूरी तक नई लाइन बनाने के लिए लगभग 1.20 करोड़ रुपये का इस्टीमेट उद्यान विभाग को सौंपा था। इस रकम को उद्यान विभाग ने बिजली निगम को सौंप भी दिया।
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इसी बीच अधीक्षण अभियंता शहरी यूसी वर्मा ने सितंबर 2019 में करीब 36 लाख रुपये का ऑनलाइन टेंडर निकाल दिया। इसमें किसी भी फर्म ने दिलचस्पी नहीं दिखाई।
 

अक्तूबर में दोबारा इसी काम का टेंडर को निकाला गया। इस बार तीन फर्मों ने दावेदारी की। एक फर्म के दस्तावेज अधूरे मिले तो उसे टेंडर से बाहर कर दिया गया। टेंडर प्रक्रिया में तीन फर्मों को भाग लेना जरूरी होता, इसलिए इस बार भी टेंडर निरस्त कर दिया गया। दिसंबर 2019 में तीसरी बार टेंडर निकाला गया और इस बार अधूरे दस्तावेज एक फर्म द्वारा जमा करने पर पर इसे वापस निरस्त कर दिया गया।

जानकर ताजुज्ब होगा कि चौथी बार निकाले गए टेंडर में चार फर्मों ने आवेदन किया और इसमें आकाश ट्रेडिंग कंपनी को अधूरे दस्तावेज के आधार पर ही टेंडर भी दे दिया गया। इसी के खिलाफ दूसरी फर्म ऋषि ट्रेडिंग कंपनी के निदेशक ऋषि आनंद चौधरी ने मुख्यमंत्री और डिस्कॉम के प्रबंध निदेशक के. बालाजी को पत्र लिखा और कहा कि टेंडर प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है।

टेंडर प्रक्रिया ऑनलाइन है। जरूरी दस्तावेज देने वाली फर्मों को ही काम मिलता है, इस मामले में ऐसा नहीं हुआ। जिस फर्म के दस्तावेज पूरे नहीं थे, उसे भी टेंडर प्रक्रिया में शामिल किया गया है। इससे टेंडर की पारदर्शिता सवालों के घेरे में आ गई है।
   
मेसर्स आकाश ट्रेडिंग कंपनी के निदेशक आकाश सिंह ने कहा कि टेंडर भरते वक्त भूलवश जरूरी कागज नहीं जमा कर सका लेकिन सभी अन्य फर्मों की तुलना में हमारे फर्म का रेट कम था। हमारी तरफ से भूल हुई लेकिन टेंडर पाने में हमारी या फर्म की कोई भूमिका नहीं।

 
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 पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक के बालाजी ने बताया कि चिड़ियाघर की नई लाइन के टेंडर में कोई गड़बड़ी हुई तो इसकी जांच कराई जाएगी। बिजली निगम द्वारा टेंडर प्रक्रिया को पूरी स्पष्ट प्रक्रिया के तहत ही किया जाता है।  टेंडर प्रक्रिया में अगर किसी तरह की शिकायत कोई भी करता है तो उसकी सुनवाई की जाएगी।

बिजली निगम के मुख्य अभियंता देवेंद्र सिंह ने बताया कि फर्म ने पहले काम कराए हैं। उसके पास सारे कागजात हैं। एक दस्तावेज कम था, जिसे मंगा लिया गया। इससे ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता है। आपको जो लिखना है, लिख दीजिए।

इन फर्मों ने डाला था टेंडर
मेसर्स अनिल कुमार सिंह, मेसर्स इलेक्ट्रो साइन इंडिया, मेसर्स ऋषि ट्रेडिंग कंपनी, मेसर्स आकाश ट्रेडर्स
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