जंगल कौड़िया ब्लॉक के ही राजाबारी गांव में पिछड़ी जाति के एक व्यक्ति की लड़की की शादी की तिथि दो दिसंबर को तय होने के साथ ही उनके घर प्रधानी पद के दावेदारों का जमावड़ा लगने लगा है। हर कोई लड़की के पिता और भाई से यह पूछ रहा है कि दूसरा दावेदार क्या दे रहा है। एक ने बक्सा देने का आश्वासन दिया है तो दूसरे ने तत्काल टीवी देने की घोषणा कर दी। इसी तरह कोई सोफा दे रहा है तो कोई ड्रेसिंग टेबल। एक ने दूल्हा और दुल्हन को हाथ की घड़ी देने का भरोसा दिया है।
जमा-जमाया व्यवसाय छोड़ ताल ठोंकने की तैयारी
खजनी, गोला, भटहट, बांसगांव, सरदारनगर आदि ब्लॉकों के कई गांवों में दिल्ली-मुंबई रहकर सालों की मेहनत से अपना व्यवसाय जमाने वाले लोग भी ताल ठोंक रहे हैं। ये अपना जमा-जमाया व्यवसाय छोड़ने को राजी हैं। यह तब है जब अभी सीटों का आरक्षण नहीं तय हुआ है। फिर भी लोग अपने गुणा-भाग से यह मान चुके हैं कहां सामान्य सीट होगी कहां पिछड़ा और कहां अनुसूचित जाति-जनजाति।
एक अक्तूबर से जैसे ही पंचायतों की मतदाता सूची के पुनरीक्षण का अभियान शुरू हुआ बैनर-पोस्टर की दुकानों पर भी भीड़ जुटने लगी है। प्रत्याशी व उनके समर्थक अपने चार पहिया-दो पहिया गाड़ियों पर पोस्टर लगाकर घूम रहे हैं। गांवों में पोस्टर चिपकने भी शुरू हो गए हैं।
दावेदार 18 साल की उम्र नहीं पूरे करने वालों को भी वोटर बनाने के प्रयास में जुटे हैं। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक जिले की कई ग्राम पंचायतों में प्रधानी पद के दावेदार अपने भरोसे वाले परिवारों के नाबालिगों को भी वोटर बनाने के लिए बीएलओ को साध रहे हैं। पंचायत चुनाव के दौरान ज्यादातर जगहों पर ऐसे ही वोटरों को लेकर विवाद भी होते हैं। हालांकि सहायक निर्वाचन अधिकारी जगनारायण का कहना है कि सभी बीएलओ की निगरानी की जा रही है। सत्यापन के काम की क्रॉस चेकिंग भी की जाती है।
अब तक 15 हजार नाम बढ़े, सात हजार कटे
जिला निर्वाचन कार्यालय (पंचायत) के मुताबिक एक अक्तूबर से शुरू हुए मतदाता पुनरीक्षण अभियान के दौरान अब तक 15 हजार लोगों के नाम मतदाता सूची में बढ़े हैं जबकि सात हजार नाम कटे हैं। इसी तरह 1700 के नाम-पते संशोधित किए जा चुके हैं। अभी 12 नवंबर तक डोर-टू-डोर अभियान जारी रहेगा। सूत्रों के मुताबिक जो 15 हजार नाम बढ़े हैं उनमें 80 फीसदी से ज्यादा युवा वोटर ही हैं जिन्होंने इसी साल 18 साल की उम्र पूरी की है।