अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक माध्यमिक शिक्षक संघ उप्र की सातवीं वार्षिक बैठक में वक्ताओं के निशाने पर सरकार की नई शिक्षा नीति, पेंशन, चिकित्सा सुविधा आदि योजनाएं रहीं। गोरखपुर विश्वविद्यालय के दीक्षा भवन में आयोजित बैठक में 14 बिंदुओं पर मांग पारित कर पत्र सरकार को भेजने पर सहमति बनी।
संघ के प्रांतीय अध्यक्ष और गोरखपुर-फैजाबाद स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए दावेदार राम प्रताप ने कहा कि शिक्षकों और कर्मचारियों को पूर्व में मिले अधिकार जैसे पेंशन, चिकित्सा सुविधा सहित अन्य वेतन भत्तों से सरकार वंचित कर रही है। मुख्य वक्ता डॉ. अनिल यादव ने कहा कि सरकार नई शिक्षा नीति द्वारा शिक्षा को निजी हाथों में देने जा रही है, यह घातक साबित होगा। मुख्य अतिथि डॉ. चंद्र भूषण अंकुर, विशिष्ट अतिथि डॉ. असीम सत्यदेव, राज्य कर्मचारी संघ उप्र के अध्यक्ष जेएन तिवारी ने भी विचार व्यक्त किए।
बैठक में पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने, उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम 2019 की समाप्ति और चयन बोर्ड 1982 की बहाली, व्यावसायिक, कंप्यूटर, वित्तविहीन, पीटीए और पैरा टीचरों को पूर्ण कालिक शिक्षक का दर्जा दिए जाने, माध्यमिक कॉलेजों में एससी, एसटी, ओबीसी के रिक्त पड़े पदों पर भर्ती करने सहित 14 बिंदुओं का मांग पत्र पारित कर इसे सरकार को भेजने का निर्णय लिया गया।
इस मौके पर डॉ. हरेंद्र मौर्य, अशोक कुमार, पुरुषोत्तम, गौतम, प्यारेलाल विद्यापति, डॉ. संजय कुमार, अभय कुमार, श्रवण कुमार, सुरेंद्र मौर्य, राजेंद्र प्रसाद, राज बहादुर आदि मौजूद रहे।