आर्मी पब्लिक स्कूल गोरखपुर। (File)
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आर्मी पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाले सिविलियंस के बच्चों को अगले सत्र से बाहर किए जाने के फैसले से अभिभावकों में आक्रोश है। नाराज अभिभावकों का कहना है कि आर्मी वेलफेयर एजुकेशन सोसायटी (एडब्ल्यूईएस) का फरमान बाल शिक्षा अधिकार का उल्लंघन है।
अभिभावक अरुण कुमार जायसवाल ने कहा कि उनका बेटा क्लास का टॉपर है। फिर भी उसे बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल में अगर संसाधनों का अभाव है तो इसे बढ़ाने की दिशा में प्रयास होना चाहिए। बच्चों को निकालना तर्क संगत नहीं है।
दाखिले के समय आर्मी स्कूल को दी वरीयता
मोहद्दीपुर के अरुण कुमार जायसवाल ने कहा कि बेटा क्लास का टॉपर है। प्रवेश के समय एयरफोर्स और आर्मी स्कूल दोनों में एक साथ चयन हुआ। तब आर्मी स्कूल को प्राथमिकता दी। अब दूसरे स्कूल में एडमिशन के लिए कहा जा रहा है।
स्कूल में न हो बच्चों के साथ भेदभाव
कूड़ाघाट के अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि आर्मी स्कूल में पढ़ने वाले सभी बच्चे एक समान हैं। उनके साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। सिविलियंस के बच्चे भी आगे जाकर आर्मी को ज्वाइन करते हैं।
बच्चों को स्कूल से निकालना अन्याय
आवास विकास कॉलोनी के धीरेंद्र सिंह ने कहा कि स्कूल से बच्चों को बाहर करना अन्याय है। स्कूल में अगर संसाधन कम हैं तो उन्हें बढ़ाया जाना चाहिए। अगले सेशन से सिविलियंस के बच्चों को प्रवेश न देने के फैसले की समीक्षा की जानी चाहिए।
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