बोर्ड परीक्षा करीब आने के साथ ही विद्यार्थियों के दिल की धड़कनें भी बढ़ने लगी हैं। परीक्षा में अच्छे परिणाम हासिल करने के दबाव के कारण उदासी, तनाव, घबराहट, बेचैनी जैसी शिकायत वाले नई उम्र के मरीजों की तादाद अचानक बढ़ गई है। जिला अस्पताल के मनोचिकित्सा कक्ष में इन दिनों औसतन 20 युवा ऐसी समस्याओं के साथ प्रतिमाह काउंसिलिंग कराने पहुंच रहेे हैं।
अस्पताल के प्रभारी व मानसिक रोग विशेषज्ञ शाही डॉ. अमित शाही ने बताया कि जनवरी-फरवरी में किशोरवय मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इनमें से अधिकतर हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा के कारण तनाव में हैं। कुछ विद्यार्थी पढ़ने में तेज हैं। बावजूद इसके इस बात को लेकर घबरा रहे हैं कि परीक्षा में ए प्लस ग्रेड लाने से वंचित न रह जाएं।
किसी छात्र की समस्या भाषा के विषय में अच्छी तरह समझ में नहीं आने की है तो किसी के लिए गणित-भौतिकी के कुछ अध्याय तैयार न होना डर और तनाव का सबब हैं। कई अभिभावक तो अपने बच्चों को सिर्फ इसलिए लेकर आ रहे हैं कि परीक्षा की तैयारी तो पूरी है लेकिन घबराहट के कारण समय पर कुछ याद नहीं रहता।
डॉ. अमित शाही ने बताया कि इन सब छात्रों से बातचीत कर उनके डर, घबराहट, तनाव का कारण समझा जाता है। उनकी समस्याओं के आधार पर सलाह दी जाती है। एक दो काउंसलिंग में अधिकतर छात्रों में परीक्षा का डर समाप्त होकर आत्म विश्वास बढ़ा है।