शनिवार को ताइक्वांडो प्रशिक्षक लालदेव यादव की अगुवाई में प्रशिक्षकों की टीम ने विद्यार्थियों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया। पांच दिवसीय शिविर के दौरान बेटियों ने छोटे छोटे दाव लगाकर मनचलों को ठिकाने लगाने की तकनीक का जमकर अभ्यास किया।
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लालदेव यादव ने बताया कि आत्मरक्षा के लिए किसी उपकरण या हथियारों की आवश्यकता नहीं है। थोड़ी सावधानी, सतर्कता और आत्मविश्वास के साथ हम किसी भी दुर्घटना से बच सकते हैं। लड़कियां किसी भी क्षेत्र में कमजोर नहीं हैं। हिम्मत, साहस और मजबूत इरादों के साथ हर कार्य करना चाहिए।
ताइक्वांडो प्रशिक्षक विशाल कुमार ने बताया कि आपात स्थिति में सुरक्षा के लिए पेन, गाड़ी की चाभी और मोबाइल का इस्तेमाल कर मनचले की पकड़ कमजोर कर सकती हैं और पलटवार कर सकती हैं। याना, प्रतिज्ञा, अंकिता राना ने शरीर के ज्वाइंट पर वार करके दूसरे की गिरफ्त से छुड़ाने, ब्लॉक और पंच करने की तकनीक बताई।
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हर्ष मौर्या और ऋतिक गौड़ ने छात्राओं को चाकू के वार से बचाव और सामने वाले को धराशायी करने की आसान तकनीक बताई। प्रधानाचार्य धीरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि मुसीबत के समय कोई आपकी मदद नहीं करता तो आपको इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है। आप खुद को इतना मजबूत बनाएं कि स्वयं जवाब दें सकें। आखिर में प्रधानाचार्य ने विद्यार्थियों को नारी गरिमा के सम्मान की शपथ दिलाई।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रधानाचार्य धीरेंद्र कुमार सिंह, ताइक्वांडो प्रशिक्षक लालदेव यादव और विशाल कुमार, शंभु कुशवाहा, जितेंद्र सिंह, सुरेंद्र देव, एसपीएन सिंह, प्रितेश पांडेय, मीनाक्षी सिंह, रमेश प्रसाद, फणीश तिवारी, विजय प्रताप तिवारी, अनमोल कुमार सिंह, प्रियंवदा सिंह, मंजरी यादव, कृष्ण चंद्र त्रिगुणायत, दीपेंद्र सिंह, अभिषेक यादव, प्रियंका सिंह, आशीष धर द्विवेदी, नागेश्वर नाथ सिंह, जगमोहन, अंशिका गौड़ आदि मौजूद रहे।
छात्राओं ने की सराहना
छात्रा मुस्कान, प्रिति और प्रांजल ने कहा कि दौर बदल रहा है। उसके साथ लड़कियों को भी बदलने की आवश्यकता है। कोई व्यक्ति रास्ते में छेड़छाड़ करता है तो उसको मुंहतोड़ जवाब दें। वहीं निशा, चारू, अदिति और पूजा ने कहा कि लड़कियां, लड़कों से कम नहीं हैं। कार्यक्रम में बचाव के बारे में बहुत अच्छे से बताया गया है। कोई मनचला परेशान करेगा तो आत्मविश्वास के साथ उसका डटकर मुकाबला करूंगी।