साइबर सुरक्षा को लेकर मौजूदा समय में सबसे ज्यादा चुनौती है। साइबर अपराधी एक ट्रोजन (छिपे हुए वायरस) से आपके डाटा पर हमला कर रहे हैं। आपका सबसे अहम डाटा आपके द्वारा एक क्लिक करने पर उन तक पहुंच जा रहा है। इसका शिकार ईरान का न्यूक्लियर पॉवर प्लांट हो चुका है। वहां पर स्टक्सनेट अटैक कर साइबर अपराधी डाटा लीक कर चुके हैं। ऐसे में छिपे हुए वायरस से बचने की जरूरत है। यह बचाव तभी हो सकेगा, जब लोग खुद नेट पर गैरजरूरी क्लिक करने से बचेंगे।
ये बातें मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) में कमांडर केके चौधरी ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान शनिवार को कहीं। कहा कि मौजूदा समय में सभी लोग इंटरनेट का उपयोग कर रहे हैं जो भी सूचना हमारे दिमाग में है, वह इंटरनेट पर जाहिर करते हैं।
उसी इंटरनेट पर साइबर अपराधी भी काम कर रहे हैं। ऑफिशियल सभी सूचनाएं, सभी डाटा उन तक पहुंच रहे हैं। साइबर अपराधी ट्रैप के जरिए डाटा चुराकर एक्सटोर्शन का काम कर रहे हैं। ईरान के न्यूक्लियर पॉवर प्लांट पर वायरस का अटैक भी हो चुका है। भारत के कुंडकुलम पॉवर प्लांट में भी स्टक्सनेट वायरस का अटैक हो चुका है।
क्या है ट्रोजन (छिपा हुआ वायरस)
कमांडर चौधरी ने बताया कि ट्रोजन एक वायरस है। जब हम इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं तो कई बार छोटे-छोटे टूल आते हैं, जिस पर क्लिक करने का ऑप्शन होता है। इस पर क्लिक करने के लिए लालच दिए जाते हैं। एक क्लिक पर आपका डाटा साइबर अपराधियों तक पहुंच जाता है।
साइबर सुरक्षा पर करने होंगे शोध
कमांडर केके चौधरी ने बताया कि साइबर सुरक्षा के लिए युवाओं को शोध करने होंगे। इस पर शोध कम कर हो रहे है। इस पर ज्यादा खर्च करने की जरूरत है। जब साइबर सुरक्षा पर शोध होंगे, तो साइबर सुरक्षा का तंत्र बेहद मजबूत होगा।